शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के 661/6 कांप्लैक्स की कार्रवाई अफसरों पर सवाल
मेरठ। शासत्रीनगर सेंट्रल मार्केट को लेकर दायर की गयी पीआईएल आवास विकास के अफसरों के लिए मुसीबत साबित होगी ऐसा दावा विधि विशेषज्ञ कर रहे हैं। कल (आज) सुप्रीमकोर्ट में दोहपर दो बजे के कोर्ट संख्या सात में होने जा रही सुनवाई में 661/6 कांप्लैक्स की पीआईएल को भी शामिल कर लिया गया है। माना जा रहा है कि पीआईएल में सेंट्रल मार्केट के कांप्लैक्स को लेकर जिस प्रकार से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अफसरों पर रिट दायर करने वालों की ओर से सवाल उठाए गए हैं उन सवालों का उत्तर तलाशना आवास विकास के अफसरों के लिए मुश्किलों भरा होना तय माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सूत्रों की मानें तो जिन छह भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गयी है उसको लेकर यदि स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किए जाने से पहले ये रिटी दायर हो गयी होती तो शायद आवास वकिास अफसरों को इतनी मुश्किलों का सामना ना करना पड़ता। क्योंकि ध्वस्तीकरण पर कृत कार्रवाई को लेकर जो रिपोर्ट दायर की जाती उसमें शायद ६६१/६ को लेकर जवाब दाखिल किए जाने की गुंजाइश बची रहती है, लेकिन अब सब गेंद कोर्ट के पाले में है। जानकारों का यह भी कहना है कि आवास विकास अफसरों के लिए मुश्किल भरा केवल 661/6 को लेकर दायर की गई पीआईएल भर नहीं है। इससे भी बड़ी मुश्किल चिन्हित किए गए भवनों की संख्या को लेकर है जो पहले 55 बतायी गयी, बाद म ें येन केन प्रकरेण उस गिनती को कम कर 44 कर दिया। सुप्रीमकोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई के दौरान आदेश दिया था कि जो 44 भवन सील किए गए हैं, उन सभी को आवंटन के समय के स्वरूप में लाया जाए, लेकिन कोर्ट के आदेशों के अनुपालन की जब बारी आयी तो कार्रवाई केवल छह पर की गयी। इनको लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं उनका सवाल भी आसान नहीं होगा।
अवमानना की लटकी है तलवार
सूत्रों की मानें तो अफसरों पर सबसे बड़ी मुसीबत उनके खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में दायर की जाने वाली अवमानना की कार्रवाई के लिए अर्जी दायर किए जाने की तैयारी है। जैसा कि सूत्र बता रहे हैं कि जो आदेश सुप्रीमकोर्ट ने दिए हैं उनका अक्षरत: पालन करने में दो कदम आगे और चार कदम पीछे वाली स्थिति के चलते ही अफसरों के लिए मुसीबत का सबब बनेगा। एक ओर अफसरों ने कृत कार्रवाई कों लेकर तमाम साक्ष्य कोर्ट में दाखिल किए हैं, वहीं दूसरी ओर जानकारी मिली है कि अवमानना की बात करने वालों ने कार्रवाई के नाम पर अफसरों के खेल यानि जैसा कि उन पर कार्रवाई में पिक एंड चूज के आरोप लगाए जा रहे हैं उससे संबंधित ठोस साक्ष्य कोर्ट में पेश किए जाएंगे। जिसके चलते माना जा रहा है कि पीआईएल समेत कई अन्य बातें अफसरों के लिए मुश्किल पैद कर सकती हैं।
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