अमित शाह ने किया हिंदी दिवस समारोह का शुभारंभ, मेरठ नराकास को मिला सम्मान, सचिव मुकेश कुमार सम्मानित
मेरठ। नवी मुंबई के वाशी में आयोजित हिंदी दिवस-2026 एवं छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में मेरठ को महत्वपूर्ण सम्मान मिला। वर्ष 2025-26 के लिए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), मेरठ को उत्कृष्ट श्रेणी में प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए नामित किया गया। इस उपलब्धि के लिए नराकास (कार्यालय), मेरठ के सचिव मुकेश कुमार को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। 14 और 15 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं सुनेत्रा अजीत दादा पवार तथा केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय और बंडी संजय कुमार सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विद्वानों, साहित्यकारों और अधिकारियों ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार, तकनीकी युग में हिंदी के बढ़ते प्रयोग तथा वैश्विक स्तर पर हिंदी की संभावनाओं पर विचार रखे। वक्ताओं ने डिजिटल एवं तकनीकी क्षेत्र में हिंदी के विस्तार और उसके प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया।
सभी कार्यालयों के सदस्यों को बधाई दी
नराकास, मेरठ के सचिव मुकेश कुमार ने बताया कि सम्मेलन में मेरठ क्षेत्र से विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल हुए। इनमें ईपीएफओ से विजयपाल सिंह, छावनी परिषद कार्यालय से संजीव विरमानी, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान से योगेश कुमार गुप्ता, रक्षा लेखा नियंत्रक से राजेश कटारिया और विजय शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। उन्होंने बताया कि सम्मेलन का समापन विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को हिंदीमय बना दिया। सचिव मुकेश कुमार ने बताया कि मेरठ नराकास को उत्कृष्ट श्रेणी में प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए नामित किया जाना क्षेत्र में राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नराकास, मेरठ के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह एवं मीडिया प्रभारी डॉ. आरसी पांडेय ने इस उपलब्धि पर नराकास से जुड़े सभी कार्यालयों के सदस्यों को बधाई दी। अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि यह सम्मान सभी सदस्य कार्यालयों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भविष्य में भी निरंतर प्रयास जारी रखने की बात कही।
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