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661/6 को लेकर दायर की गयी पीआईएल

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पीड़ित बोले जब बाकियों को छज्जे तोड़कर छोड़ा जा रहा है तो क्यों कर दिया ध्वस्त, कार्रवाई को लेकर आवास विकास अफसरों पर गंभीर सवाल, सुप्रीमकोर्ट में दायर की गयी स्टेटस रिपोर्ट

मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के भूखंड संख्या 661/6 पर बने कांप्लैक्स का ध्वस्तीकरण आवास विकास अफसरों के गले की फांस बन सकता है। वहां के तमाम व्यापरियों की ओर से एक पीआईएल सुप्रीमकोर्ट में दायर की गयी है। सुप्रीमकोर्ट ने इसको सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिए है। पीआईएल में कहा गया है कि कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई के नाम पर जब अन्य के केवल छज्जे तोड़े जा रहे हैं तो फिर उनके भी केवल छज्जे क्यों नहीं तोड़ दिए गए। पूरा भवन किस के इशारे पर ध्वस्त कर दिया गया। पिटिशन राजेन्द्र कुमार बड़जात्या की ओर से दर्ज की गयी है। उम्मीद की जा रही है कि २१ को इसे सुनवाई में शामिल किया जा सकता है।

ये दिए गए हैं तर्क

बताया गया है कि पीआईएल में इस बात पर आपत्ति की गई है कि कोर्ट के आदेश पर सेटबैक हटाने के नाम पर जब बाकि भवनों के केवल फ्रंट तोड़ गए हैं तो फिर किस वजह से 661/6 कांप्लैक्स को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। कार्रवाई के नाम पर ६६१/६ साथ यह नाइंसाफी क्यों की गयी। आवास विकास के कार्रवाई करने वाले अफसर 661/6 कांप्लैक्स की भी सेटबैक के लिए जगह लायक तोड़फोड़ कर देते। आपत्ति करने वालों का यह भी कहना है कि उनका जो निर्माण ध्वस्त कर दिया गया है उसका निर्माण आवास विकास के अफसर करें। विधि विशेषज्ञों की राय में यह आधार आवास विकास अफसरों के लिए परेशानी की वजह बन सकता है।

बाकियों पर मंडराया खतरा

इस आईपीएल के दाखिल किए जाने और सुनवाई के लिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा स्वीकार कर लिए जाने के बाद अब बाकि जितने भी सेटबैक कार्रवई की चपेट में भवन आए माने जा रहे हैं उन पर बड़ा खतरा मंडराने की बात कही जा रही है। दरअसल ध्वस्तीकरण की जो कार्रवाई 661/6 पर की गई कयास लगाए जा रहे हैं कि आवास विकास अफसरों को बाकि भवनों पर भी उसी तर्ज पर कार्रवाई करनी पड़ सकती है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कार्रवाई के नाम पर आवास विकास अफसरों पर पहले ही पिक एंड चूज के आरोप लग रहे हैं और ये आरोप भाजपा के कदावर नेताओं द्वारा लगाए गए हैं।

56 से 6 का सफर

सेटबैक के नाम पर जिन भवनों पर कार्रवाई की जानी थी, उनकी संख्या शुरू में ५६ बतायी गयी थी, बाद में अफसरों ने हिी बताया कि ऐसे भवन 44 हैं। इन भवनो ंको सील भी किया गया, लेकिन 21 सितंबर की सुनवाई से पहले जिन भवनों पर सेटबैक के नाम पर कार्रवाई की गयी उनकी संख्या घट कर महज छह पर आकर सिमट गयी। इनको लेकर भी अफसरों पर सवालों की बौछार की जा रही है। वहीं दूसरी ओर छह भवनों पर जो कार्रवाई की गयी है उसको लेकर कृत कार्रवाई की रिपोर्ट सुप्रीमकोर्ट में दाखिल कर दी गयी है।

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