अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की झुंझलाहट या कुछ और रूस, चीन और ईरान के करीब आने से परेशान हैं अमेरीकि राष्ट्रपति
नई दिल्ली। भारत पर 100% टैरिफ लगाने का खतरा (यूएस सैंक्शंस बिल) मुख्य रूप से भारत द्वारा रूस से भारी मात्रा में रियायती कच्चा तेल खरीदने का सीधा साइड-इफेक्ट है, न कि पीएम मोदी के जन्मदिन का कोई गिफ्ट, जैसा की कांग्रेस समेत सारा विपक्ष प्रचारित कर रहा है, हालांकि इसकी टाइमिंग को लेकर भू-राजनीतिक गलियारों में इसे ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) में रूस, चीन और ईरान की एकजुटता और रणनीतिक निकटता के बाद अमेरिकी झुंझलाहट और जवाबी प्रतिक्रिया के रूप में जरूर देखा जा रहा है।
निकल रहा है यूएस का तेल
डोनाल्ड ट्रंप की इस कडवाहट और झुंझलाहट के पीछे तेल का खेल माना जा रहा है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) ने ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ को मंजूरी दी है। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) ने ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ को मंजूरी दी है। भारत वर्तमान में रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक है, इसलिए वह सीधे तौर पर इस कानून के निशाने पर आ गया है। अमेरिका का मानना है कि तेल खरीद के जरिए ये देश यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।
साइड इफैक्ट और टाइमिंग
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के नेताओं की मेजबानी की। सम्मेलन के तुरंत बाद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) द्वारा इस कड़े बिल को पारित किया गया। इसी वजह से विशेषज्ञ इसे ब्रिक्स के ‘पावर शो’ से उपजी वाशिंगटन की कूटनीतिक नाराजगीऔर पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को चुनौती देने के खिलाफ एक अमेरिकी संदेश मान रहे हैं। इस कानून में एक ‘वेवर क्लॉज’ (छूट का प्रावधान) भी शामिल है, जिसके तहत यदि अमेरिकी राष्ट्रपति को लगता है कि भारत पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी राष्ट्रीय हितों या वैश्विक ऊर्जा बाजार को नुकसान होगा (जैसे तेल की कीमतें बढ़ना), तो वे भारत को इससे छूट दे सकते हैं।
ट्रंप का मोदी का बर्थडे गिफ्ट नहीं
भारत पर 100% टैरिफ की यह तलवार किसी व्यक्तिगत अवसर या ‘बर्थडे गिफ्ट’ का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से एक कठोर कूटनीतिक और आर्थिक हथियार है, जिसका इस्तेमाल अमेरिका रूस और ईरान को अलग-थलग करने तथा भारत-चीन जैसे देशों पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है। भारत सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि वह अपने आर्थिक व ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।
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