स्मार्ट क्लास हैं लेकिन बच्चों के लिए उपयोग नहीं, टेबलेट है लेकिन टीचर के घर पर, सीएम योगी के स्कूल चलो अभियान को पलीता
मेरठ। कंपोजिट विद्यालय गगोल में यूं कहने को 14 टीचर और एक अनुदेश हैं, इतना अमला होने के बावजूद सीएम योगी के स्कूल चलो अभियान के तहत महज चौदह बच्चों का ही एडमिशन कराया जा सका। नौबत एडमिशन की संख्या कम होने या कहें इस स्कूल के स्टाफ द्वारा सीएम योगी के स्कूल चलो अभियान को पलीता लगाने तक ही रह जाती तो भी गनीमत थी। कहने को इस स्कूल में स्मार्ट क्लास है, लेकिन इस स्मार्ट क्लास का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई के लिए नहीं किया जा रहा है। जब बच्चों को स्मार्ट क्लास में ले जाया ही नहीं जाएगा तो बच्चे कैसे स्मार्ट होंगे। इससे अलावा बच्चों को पहाड़े और सामान्य ज्ञान के डीएम के निर्देशों को लेकर भी भरपूर लापरवाही बरती जा रही है। स्कूल का टैबलेट जिसका प्रयोग बच्चों को पढ़ाने में किया जाना चाहिए वो टीचर के घर पर रखा हुआ है। ये तमाम खुलासे बीएसए और विकास खंड़ के खंड शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण में हुए हैं।
स्कूल में मिली खामियां ही खामियां
डीएम के निर्देश पर किए गए निरीक्षण में इस स्कूल में खामियां का पहाड़ मिला है। निरीक्षण को लेकर एक रिपोर्ट खंड़ शिक्षा अधिकारी ने रिपोर्ट प्रेषित की है उसमें कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान विद्यालय में कुल कार्यरत 13 अध्यापक व 01 अनुदेशक, 01 च.क. के सापेक्ष 04 अध्यापक अवकाश पर पाये गये। विद्यालय में कुल नामांकन 226 के सापेक्ष 140 बच्चे उपस्थित पाये गये जोकि अत्यंत न्यून है। गत वर्ष नामांकन 267 के सापेक्ष 226 रह गया है जबकि नवीन शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरूआत 01 अप्रैल 2026 से प्रथम स्कूल चलो अभियान पूर्ण होने व द्वितीय स्कूल चलो अभियान 01 जुलाई से 25 जुलाई तक होने के उपरान्त भी विद्यालय में कुल नामांकन 14 पाया गया जोकि अत्यंत न्यून है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक व अन्य स्टॉफ के द्वारा नामांकन में कोई रूचि नहीं ली जा रही है, जबकि उक्त के संबंध में परिवार सर्वेक्षण रजिस्टर व जनगणना रजिस्टर के अनुसार घर-घर अभिभावको से संपर्क स्थापित कर जियो टैग फोटो व अभिभावक संपर्क रजिस्टर में अभिभावको के हस्ताक्षर कराने अनिवार्य है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक से अभिलेख उपलब्ध कराने हेतु कहने पर उनके द्वारा अभिलेख उपलब्ध कराने में असमर्थता व्यक्त की गई। यह आदर्श शिक्षक आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। सौंपे गये कार्यों एवं दायित्वो के प्रति घोर उदासीनता बरत जा रही है। सालों से यहां मरम्मत व रंगाई-पुताई नहीं हुई है। बीएसए ने जब कंपोजिट ग्रांट से संबंधित रजिस्टर मांगा तो इंचार्ज प्रधानाध्यापक ने रजिस्टर घर पर होने की बात कही। किसी भी कक्षा कक्ष में टीएलएम उपलब्ध नहीं पाये गये जिससे प्रतीत होता है कि विद्यालय स्टॉफ के द्वारा शिक्षण कार्य में कोई भी रूचि नहीं ली जा रही है।
गया।
परले दर्ज की लापरवाही का आलम
इंचार्ज प्रधानाध्यापक से स्पोर्ट्स से संबंधित सामान व रजिस्टर दिखाने हेतु कहने पर उपलब्ध न होना बताया। इतना ही नहीं कक्षा-कक्षो में बिजली फिटिंग पंखे व फर्नीचर आदि की मरम्मत व समुचित लाईट की व्यवस्था नहीं मिली। आग हादसों से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र लापरवाही की दशा में मिले। नवीन निर्माण से संबंधित कोई भी अभिलेख मस्टर रॉल, साईट पंजिका, निर्माण संबंधी सामग्री कय के संबंध में कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। कक्षा-6 में ब्लैक बोर्ड, छत व दरवाजे क्षतिग्रस्त मिले।
डीएम के आदेश सिर माथे मगर मानेंगे नहीं
विद्यालय में स्मॉर्ट क्लास का उपयोग नहीं कराया जा रहा है तथा टीचर रितिका शर्मा के अवकाश पर होने के उपरान्त बच्चो को संबंधित विषय का शिक्षण कार्य नहीं कराया जा रहा है जबकिइंचार्ज प्रधानाध्यापक कविता गुप्ता स्वयं विज्ञान/गणित श्रेणी से है।टीचर चंचल वर्मा डीएम द्वारा दिये गये निर्देश पहाड़े व सामान्य ज्ञान का कार्य नहीं कराया जा रहा है। विद्यालय का टैबलेट भी विद्यालय न रखकर उन्होंने घर पर रखा हुआ है तथा अपनी कक्षा से संबंधित कोई भी कार्य संतोषजनक नहीं किया जा रहा है। किसी भी अध्यापक / कक्षाध्यापक द्वारा शिक्षण कार्य व डीएम के निर्देश पर पहाड़े व सामान्य ज्ञान के कार्य में कोई भी रूचि नहीं ली जा रही। जगह-जगह गंदगी फैली हुई है, शौचालय के दरवाजे व मल्टीपल हैंडवाश क्षतिग्रस्त अवस्था में पाये गये।विद्यालय में निःशुल्क पाठ्य पुस्तक व्यवस्थित अवस्था में नहीं पायी गयी।
Leave a comment