तारापुरी से अफसरों का सौतेला रवैया किस से करें शिकायत
तारापुरी से अफसरों का सौतेला रवैया किस से करें शिकायत
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मेरठ। जीते जी यदि नरक देखना है तो लिसाड़ीगेट क्षेत्र के तारापुरी और इससे सटी हुई बस्तियों में आकर देखा जा सकता है। करीब एक लाख की आबादी वाला यह इलाका केवल नगर निगम ही नहीं बल्कि पीवीवीएनएल यानि बिजली और दूसरे वो महकमे जिनका ताल्लुक जनता को सहुलियत मुहैय्या कराने से है, के अफसरों की बेरूखी का दंश झेलने या कहें शापित होने को मजबूर हैं। तारापुरी और इससे सटे गली मोहल्ले देखकर लगता नहीं कि यह बस्ती स्मार्ट सिटी का दम भरने की बात करने वाले किसी महानगर की हो सकती है। यदि यही स्मार्ट सिटी की तस्वीर है तो फिर तौबा है ऐसी स्मार्ट सिटी से। तारापुरी का एक बड़ा इलाका नगर निगम के वार्ड 81 का हिस्सा है। यहां की मुसीबतों की यदि बात की जाए तो वो बेशुमार हैं।
बगैर बारिश जलभराव
तारापुरी को नरक इसलिए भी कहा जा सकता है कि साफ सफाई के लिए जिम्मेदार अफसर भले ही कुछ भी दावे करते हो, लेकिन यहां सफाई की बदइंतजामी का आलम यह है कि बगैर बारिश के यहां सड़कों और गलियों में जलभराव मिलेगा। बच्चों को स्कूल यदि जाना होता है तो उन्हें पहले रास्तों में भरी पानी की वजह से बनी नारकीय स्थिति से होकर गुजरना होता है। यहां के हालात किसी मलिन बस्ती से भी बुरे हैं। इस इलाके की पूरी तरह से डेमेज हो चुकी सड़कें बता रही हैं कि उन्हें इलाज यानि मरम्मत की दरकार है। चोक हुई नाले नालियां चींख चींख कर कह रहे हैं कि उनका दम घुट रहा है, उनमें फंसा हुआ कूडा कचरा कोई आकर निकाल दे ताकि पानी आराम से बह सके और सड़कों व गलियों में ना फैले। यचहां घुटनों तक जलभराव आमबात है। लोग केवल नगर निगम की वजह से ही मुसीबत में नहीं हैं, इस इलाके में बिजली के खुले हुए बॉक्स और उनमें से झांकने जानलेवा बिजली के ताैर मौत की दावते देते नजर आते हैं।
बारिश के नाम पर सूखता है दम
इस इलाके का हाल कितना बुरा और खराब है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के लोगों की रूह बारिश के नाम से कांप जाती है। लोगों का कहना है कि जब बगैर बारिश के ही यहां नाले नालियों का पानी रास्तों और घरों में भर जाता है तो फिर जनाव बारिश में सोचिए किन हालातों में हरने को यहां के वाशिंदों को मजबूर होना पड़ता होगा। घनी आबादी वाले इस इलाके के लोगों को गर्मी का ताप मंजूर है लेकिनद गर्मी से राहत देने वाली बारिश उन्हे कतई मंजूर नहीं। वो बताते हैं कि बारिश में घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। करीब एक लाख आबादी वाले इस वार्ड के लोगों का आरोप है कि पार्षद से लेकर महापौर और नगर आयुक्त तक शिकायतें पहुंचीं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। वार्ड के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, इसलिए न सड़क पूरी बनती है, न जल निकासी की व्यवस्था होती है।
निगम से नाराजगी
इस इलाके की पार्षद गुडडी चौधरी के शौहर अफजाल लोगों की सारी मुसीबत का ठीकरा नगर निगम के सफाई महकमे के सिर फोड़ते है। यहां के बिजली खंभों पर खुले बॉक्स और नीचे तक लटकते तार मिले। कई स्थानों पर बिजली के तार सड़क के बेहद करीब दिखाई दिए। खंभों में अक्सर स्पार्किंग और आग लग जाती है। कई बार तार टूटकर सड़क पर गिर चुके हैं, जिससे हादसे भी हुए हैं, लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। वार्ड के कई हिस्सों में सड़क किनारे कूड़ा जमा मिला। नालियों की सफाई न होने से गंदा पानी बाहर तक बह रहा था।
ये हैं वो मुसीबतें जो उठानी हैं पड़ रहीं
वार्ड की कई सड़कें पूरी तरह उखड़ी हुई हैं। जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हैं, जिनसे रोजाना वाहन चालक और राहगीर परेशान होते हैं। लोगों का कहना है कि कई वर्षों से सड़कें नहीं बनीं। बरसात में यही गड्ढे पानी से भर जाते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। समर गार्डन और आसपास के क्षेत्रों में कई जगह सड़क का एक हिस्सा बना दिया गया, जबकि दूसरा हिस्सा पुरानी स्थिति में छोड़ दिया गया है। इससे रास्तों का स्तर असमान हो गया है। लोगों का कहना है कि सड़क ऊंची होने से बारिश का पानी घरों में घुस जाता है। जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। कई नाले कचरे से भरे मिले। सफाई न होने के कारण पानी की निकासी बाधित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की बारिश में भी घुटनों तक पानी भर जाता है और कई बार घरों के अंदर तक पानी पहुंच जाता है। अधूरी सड़कें और जाम नालियां जलभराव की सबसे बड़ी वजह हैं। कई क्षेत्रों में सड़कें ऊंची और गलियां नीची होने से पानी सीधे घरों में घुस जाता है। बरसात के दौरान लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
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