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नेताओं को फुर्सत नहीं अफसर सुनते नहीं जाएं तो जाएं कहां

नेताओं को फुर्सत नहीं अफसर सुनते नहीं जाएं तो जाएं कहां

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नेताओं को फुर्सत नहीं अफसर सुनते नहीं जाएं तो जाएं कहां
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मेरठ। छावनी इलाके से सटे कासमपुर के व्यापारियों का सारा काम धंधा कैंट क्षेत्र यानि फौजी परिवारों से आने वाले ग्राहकों पर निर्भर है। लेकिन बीते एक साल से यहां अंडरपास का काम अटका होने की वजह से जो ग्राहक छावनी क्षेत्र मसलन फौजी परिवारों से खरीदारी के लिए आया करते थे वो अब नहीं आ रहे हैं, जिसकी वजह से दुकानदारी का भट्टा पूरी तरह से बैठ गया है। अंडरपास का काम जल्दी पूरा हो इसके लिए नेताओं से कई बार बताया जा चुका है लेकिन लगता है कि उन्हें ना तो फुर्सत है ना ही पब्लिक की मुसीबतों से कोई सरोकार रह गया है। जहां तक अफसरों की बात है तो वो सुनने काे तैयार नहीं। हालत यह है कि नेताओं को सुनने की फुर्सत नहीं और अफसर हैं कि सुनते नहीं।

कासमपुर के लोगों का कहना है कि उनकी सारी दुकानदारी और कारोबार का दारोमदार कामसपुर से सटे छावनी इलाके में रहने वाले फौजी परिवारों से है। यहां बड़ी संख्या में फौजी परिवार के लोग खरीदारी करने के लिए आया करते थे, लेकिन अब वो नहीं आ रहे हैं। जिसकी वजह से सारा काम धंधा ठप्प हो गया है। उन्होंने बताया कि दरअसल कासमपुर में निर्माणाधीन अंडरपास व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गया है। रेलवे अंडरपास का निर्माण पिछले एक साल से अधूरा है, जिससे कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है। 100 मीटर की दूरी तय करने के लिए लोगों को 5 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ऐसे में पांच किलोमीटर का राउंंड लगाने के बजाए फौजी परिवार के लोग या तो कंकरखेड़ा या फिर सदर और लालकुर्ती खरीदरी के लिए जाते हैं। वहां खरीदारी करने को वो तमाम तरह से सहूलियत भरा समझते हैं।

एक हो तो बताएं मुसीबत ही मुसीबत

नगर निगम का वार्ड 9 कामसपुर इलाके की बात करें तो यहां के लोगों का कहना है कि यहां एक मुसीबत हो तो बताएं। मुसीबतों का दूसरा नाम कासमपुर है। इस वार्ड की तीस हजार की आबादी के लोगों ने नगर निगम के अफसरों के सामने अपनी बात उठाने लिए रेशना सोनकर को चुना था। लेकिन आरोप है कि रेशमा सोनकर से जितनी उम्मीदें की थी उस पर वो खरी नहीं उतर पा रही हैं। जहां तक समस्याओं की बात है तो इस वार्ड में टूटी सड़कें, जाम नालियां, घरों के ऊपर से गुजरती हाईटेंशन लाइन, आवारा पशु और जगह-जगह फैला कूड़ा लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं। सरकारी जमीन पर कूड़े और गोबर के ढेर लगे मिले। रेलवे लाइन के किनारे खुले में कूड़ा पड़ा मिला, जिससे बदबू और गंदगी फैली हुई है। नालों की सफाई तो कर दी जाती है, लेकिन निकाला गया कूड़ा कई दिनों तक सड़क किनारे पड़ा रहता है। बारिश में वही कूड़ा दोबारा नालियों में बह जाता है, जिससे जल निकासी बाधित होती है। रेलवे लाइन के किनारे भी कूड़े के ढेर लगे रहने से बदबू और बीमारियों का खतरा बना हुआ है। मुख्य सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। बारिश में जलभराव और कीचड़ के कारण लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। कई मकानों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। वहीं स्ट्रीट लाइटें दिन में भी जलती रहती हैं और कई स्थानों पर व्यवस्था खराब है। नालों के किनारे अतिक्रमण और कूड़े के ढेर के कारण सफाई प्रभावित होती है। शाम के समय अतिक्रमण वाली जगहों पर असामाजिक तत्व भी जुट जाते हैं। वार्ड की पार्षद रेशमा सोनकर भी मान रही हैं कि अंडरपास का काम अटका होने से काफी दिक्कतें लोगों को हो रही हैं। उन्होंने बताया कि बाकि जो समस्याएं हैं उन पर काफी काम भी कराया जा रहा है।

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