नई दिल्ली। कतर स्थित अमेरिका के एक फौजी बेस को ईरान ने फतह मिसाइलें दागकर पूरी तरह तबाह कर दिया है। 28 फरवरी से शुरू हुई ईरान से अमेरिका और इजरायल की जंग के बाद से ईरान का यह अमेरिका पर बड़ा हमला है। इस हमले में अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचा है। हमले के बाद वहां से अमेरिकी सैनिक अपना सामान समेट कर निकल गए। वहीं दूसरी ओर ईरानी मिसाइलों के हमले की मार की गूंज व्हाईट हाउस तक सुनाई दे रही है। ईरान के इस बड़े हमले से केवल व्हाइट हाउस ही नहीं पेटागन के थिक टैंक की पेशानी पर बल पड़ गए हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान और ओमान सरीखे देशों की बातचीत की कोशिशों के दौरान अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी शहरों को निशाना बनाया था। वहां काफी नुकसान पहुंचाया था। ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनी गार्ड कोर का कहना है कि उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं किया केवल अमेरिका से हिसाब चुकता किया है। हालांकि ईरानी हमले से पहले अमेरिका की ओर से सफाई दी गयी थी कि दक्षिण ईरान में उसकी कार्रवाई उनके MQ1 ड्रोन को गिराने और समुद्री जहाजों के लिए खतरा बने ईरानी हथियारों को नष्ट करने के लिए की गई थी। ईरान की तरफ से कहा गया है कि अमेरिकी सेना की इस आक्रामकता का बदला लेने के लिए IRGC के एयरोस्पेस फोर्स ने उस एयर बेस पर मिसाइल/ड्रोन से जवाबी हमला किया।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को “कागजी शेर” करार देते हुए उनकी सुरक्षा क्षमता पर सवाल उठाए।एक्स पर एक पोस्ट में खामेनेई ने कहा, “अमेरिका के ये कागजी शेर जैसे ठिकाने खुद की सुरक्षा भी नहीं कर सकते, क्षेत्र के अमेरिकी समर्थकों की तो बात ही छोडि़ए।” उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी है। मोजताबा ने कहा कि अब इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।खामेनेई ने ‘अमेरिका का नाश हो’ और ‘इजराइल का नाश हो’ के नारों को इस्लामी दुनिया की एकजुटता का प्रतीक बताते हुए इन्हें दुनिया भर के दबे-कुचले लोगों का नारा बनाने की अपील की।
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