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जिससे हो सकता था भला उस पर साधी चुप्पी

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जिससे हो सकता था भला उस पर साधी चुप्पी
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मेरठ। सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर सेंट्रल मार्केट में सील की गयी 44 दुकानों को राहत के लिए तमाम जतन के बाद भी मुसीबत जस की तस है। वहीें दूसरी ओर नेताओं ने भी अब इस मामले से किनारा कर लिए है। इसका नतीजा यह हुआ कि धरना स्थल पर नेताओं की आमद अब नहीं रही है। और तो और भाजपा के नेताओं तथा जन प्रतिनिधियिों ने भी सेंट्रल मार्केट के 44 व्यापारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। भाजपा नेताओं का तो यह हाल है कि सेंट्रल मार्केट के सवाल पर अब काटने को दौड़ते हैं, लेकिन आज इतना जरूर हुआ है कि व्यापारियों को लेकर संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष डीएम से मिलने पहुंचे और उन्हें सीएम को संबोधित छह सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इस बीच नाटकीय घटनाक्रम में सचिन सिरोही की गिरफ्तारी हुई है। सचिन सिरोही कई दिन से एलान कर रहे थे कि वो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने जाएंगे। हालांकि इसकी तारीख कई बार बढ़ाई गयी। फाइनली आज वह ऊंगलियों पर गिनने लायक लोगों को लेकर अमित शाह से मिलने के लिए पैदल यात्रा पर रवाना हुए, लेकिन उनकी पैदल यात्रा शुरू होने से पहले ही पुलिस ने खत्म करा दी। उन्हें और उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उन्हें बाद में सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया गया। वहीं दूसरी ओर सेंट्रल मार्केट के जिन 44 व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने सील लगा दी है, उन्होंने बताया कि तमाम जतन कर चुके हैं, कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है। उन पर आयी मुसीबत अभी बरकरार है। इस मामले में अगली सुनवाई १४ जुलाई को होनी है। सेंट्रल मार्केट के मामले में तमाम बातें की जा रही हैं, लेकिन जिन अधिकारियों के खिलाफ खुद आवास विकास परिषद ने मुकदमा दर्ज कराया है, उनकी गिरफ्तारी पर बात नहीं की जा रही है। यहां तक कि आवास विकास परिषद और पुलिसऔर प्रशासन के अधिकारी भी नामजद कराए गए अधिकारियों पर कार्रवाई पर चुप्पी साधे हैं। वहीं दूसरी ओर राहत की उम्मीद में सेंट्रल मार्केट के व्यापारी आज भी सड़क पर बैठै हैं।

जिससे हो सकता था भला उस पर साधी चुप्पी

सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को राहत के नाम पर व्यापार संघ के नेता आज डीएम से मिलने के लिए गए। उन्होंने सीएम को संबोधित एक ज्ञापन डीएम को सौंपा। इसके अलावा उन्होंने कुछ अपनी मांगें भी रखीं। जानकारों का कहना है कि इस मामले में केवल एक मांग सरकार से की जानी थी वो ये कि जितनें भी अवैध निर्माण आज की तारीख तक हुए हैं, उन सभी को नियमित किया जाता है और आज के बाद जो अवैध निर्माण होंगे उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन जो ज्ञापन दिया गया उसमें इस बात का कही कोई जिक्र माजरा नहीं। यह पहला मौका नहीं है जब ऐसा हुआ है। सेंट्रल मार्केट के ४४ दुकानदारों के मामले को जब-जब आवाज उठाने की बात किसी ने भी की खासतौर से जो भाजपा नेताओं ने वो सभी आज तक किए गए निर्माणों को नियमित किए जाने की बात से कन्नी काटते या फिर भागते हुए नजर आए।

ज्ञापन में सीएम से ये की गयी हैं मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि जितने भी अधिकारी शुरूआत से अब तक आवास विकास परिषद में तैनात रहे हैं उनकी कार्यशैली की निष्पक्ष जांच करायी जाए, मेरठ में तैनात रहे आवास विकास के अधिकारियों की अन्य जिलों में उनकी तैनाती की जांच करायी जाए, दोषी अधिकारियों की संपत्ति जब्त की जाए, उनकी संपत्ति पर बुलडोजर चलाए जाएं। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया जाए। सुप्रीमकोर्ट में मामले की पैरवी सरकार के स्तर से की जाए। जिन व्यापारियो ंका रोजगार खत्म हो गया है, उनके पुनर्वास का इंतजाम सरकार प्राथमिकता के आधार पर करे। इसके अलावा व्यापारी नेताओं ने कहा कि उनके लाइसेंस की फाइल केवल इस आधार पर रोक दी गयी है क्योंकि उन मुकदमे हैं। अजय गुप्ता का कहना है कि ये सभी राजनीतिक मुकदमें है। इस आधार पर लाइसेंस की फाइलें रोका जाना मुनासिब नहीं।

ये रहे मौजूद

डीएम से मिलने वालों में सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के अलावा अध्यक्ष अजय गुप्ता, पवन मित्तल कोषाध्यक्ष, दलजीत सिंह महामंत्री, अरुण वशिष्ठ, अंकुर गोयल खंदक, अंकित मनु आदि भी शामिल रहे।
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