नई दिल्ली। कई देशों में भूखमरी की हालात होगी। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की जंग के अलावा दूनिया के दूसरे इलाकों में चल रही लड़ाई की वजह से पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आने वाली है। यह चेतावनी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने चेतावनी दी है। साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि यदि पूरी दुनिया में लड़ाई नहीं बंद की गयी तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी की बड़ी मार पड़नी तय है। नौकरियां खत्म होंगी। बेरोजगारी की हालत पैदा होगी। कई देशों में ग्रहयुद्ध की स्थिति बन जाएगी। यह हालत युद्ध से भी बुरी होगी। बच्चों के भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।
कीमते होंगी आसमान पर
आईएमएफ़ ने कहा है कि लड़ाई बंद होने के बाद भी इसके साइड इफैक्ट अरसे तक दुनिया पर बने रहेंगे। सबसे बुरा हाल तेल और गैस की कीमतों का होने वाला है। आईएमएफ़ ने कहा कि अगर तेल, गैस और खाने की क़ीमतें इस साल और अगले साल भी बढ़ती रहीं तो दुनिया की ग्रोथ दो प्रतिशत से नीचे गिर जाएगी। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी आशंका जता रहे हैं कि यह ग्रोथ पांच फिसदी तक भी गिर सकती है। ऐसा अफ्रीकी देशों में हो सकता है जहां पहले से भूखमरी है। अमेरिका का भी मानना है कि “थोड़ा सा आर्थिक दर्द” उस जोखिम को ख़त्म करने के लिए एक स्वीकार्य क़ीमत है, जिसमें ईरान पश्चिमी राजधानियों पर परमाणु हथियारों से हमला कर सकता है। कच्चे तेल की क़ीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव आ रहा है।
अभी शुरूआत भर है
अमेरिका और ईश्रान के बीच अभी सीज फायर जारी है, लड़ाई बंद नहीं हुई है, लेकिने तमाम देशों में तेल और गैस की भारी किल्लत हो गयी है। युद्ध शुरू होने के छह सप्ताह से अधिक समय बाद ऊर्जा की क़ीमतें बढ़ गई हैं, क्योंकि होर्मुज़ स्ट्रेट का अहम शिपिंग मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया। यह समुंद्र रास्ता ईरानी मिसाइलों की निगरानी में है। ईरान के डर से कोई भी देश यहां तक कि अमेरिका भी इस समुंद्री रास्ते में घुूसने की हिमाकत नहीं का रहा है। इसकी साइड इफैक्ट दुनिया के देश भीषण मंदी के रूप में देखेेंगे।
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