मेरठ/ सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की करुण पुकार संभवत: सुप्रीमकोर्ट के दर तक पहुंच गयी है। गुरूवार को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीमकोर्ट ने जिन 44 दुकानों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही थी उनको बड़ी राहत अपने आदेश में दी है। सुप्रीमकोर्ट ने आदेश में कहा है कि आवासीय से अवैध रूप से व्यवसायिक में तब्दील कर दिए गए भवनों का यदि सेटबैक ठीक कर लिया जाता है तो अगली सुनवाई में ऐसे व्यापारियों के राहत के आग्रह पर विचार किया जाएगा। दरअसल सुप्रीमकोर्ट ने दो टूक कह दिया है कि जब तक सेटबैक ठीक नहीं कर लिया जाता, तब तक कोई राहत नहीं। जिन भवनों को लेकर पिछली सुनवाई के दौरान आदेश दिया गया है उस सभी को अपना सेटबैक ठीक करना होगा। मसलन आवास विकास से आवंटन के समय भवन की जो स्थिति थी बतायी गयी है, उसी स्थिति में लाना होगा। भवन के आगे पीछे तथा दाएं बाएं जितनी भी जगह छूटी होनी चाहिए, उतनी छोड़ी जाए।
सुप्रीमकोर्ट के आज के इस आदेश को उन सभी 44 व्यापारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जो कई दिनों से मकान दुकानों के बुलडोज होने के डर के चलते ठीक से सो तक नहीं पाए हैं। इन सभी ४४ व्यापारियों को सुप्रीमकोर्ट ने 14 जुलाई तक का वक्त दिया है। यहां यह भी गौरतलब है कि जिन सभी 44 कथित अवैध रूप से निर्माण किए गए भवनों को सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर आवास विकास परिषद के अफसरों ने सील कर दिया है, व्यापारी पूछ रहे हैं कि आवास विकास परिषद पहले सील तो हटाए उसके बाद ही सुप्रीमकोर्ट के आदेशानुसार सेटबैक छोड़ा जाएगा। सुप्रीमकोर्ट के आज क ेआदेश को व्यापारी अपने के बड़ी राहत मान रहे हैं, हालांकि उन्हें अभी सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद आवास विकास परिषद की ओर से कार्रवाई का इंतजार है। सुप्रीमकोर्ट के आदेश का सभी व्यापारियों ने स्वागत किया है। वो सभी सुप्रीमकोर्ट के आदेश के अनुसार भवन में बदलाव को सहमत हैं।
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