SIAM ने नए पेट्रोल को लेकर एक पत्र सरकार को लिखा था यह गोपनीय पत्र मीडिया में लीक हुआ, बाद में पत्र लिया वापस
नई दिल्ली। E-20 पेट्रोल के मसले पर भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के सबसे बड़े संगठन SIAM (Society of Indian Automobile Manufacturers) ने एक ऐसा यू-टर्न लिया, जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे ‘सरकारी दबाव’ माना जा रहा है। SIAM ने नए पेट्रोल को लेकर एक पत्र सरकार को लिखा था यह गोपनीय पत्र मीडिया में लीक हुआ, जिसके बाद जैसे आशंका थी वैसा ही हुआ, देशभर में हंगामा मच गया। इसके चंद घंटों के भीतर (4 अगस्त 2026 की रात) SIAM ने अपना पत्र वापस ले लिया और एक नया स्पष्टीकरण जारी कर दिया। और सफाई देने पर उतर आए। सांसद संजय सिंह ने इसको सरकारी खौफ करा दिया। सियाम (SIAM) के इस अचानक यू-टर्न को लेकर ऑटो सेक्टर और राजनीतिक गलियारों में सरकार के भारी दबाव (Administrative Pressure) की चर्चाएं बेहद तेज हैं
जतायी थीं चिंता
28 जुलाई 2026 को SIAM ने पेट्रोलियम मंत्रालय को एक आधिकारिक पत्र लिखा था। इस पत्र में ऑटो कंपनियों ने गंभीर चिंताएं जताई थीं। E20 पेट्रोल आने के बाद वाहनों के फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप और एग्जॉस्ट सिस्टम (EGR वॉल्व) जैसे पार्ट्स के खराब होने के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। कुछ फ्यूल सैंपल्स में क्लोराइड (Chloride) की मात्रा बहुत ज्यादा और नमी (Moisture) पाई गई, जिससे इंजन के हिस्सों में जंग (Corrosion) लग रही थी। SIAM ने साफ कहा था कि ईंधन की इस खराब क्वालिटी के कारण उपभोक्ताओं का E20 नीति से भरोसा उठ सकता है। इस चेतावनी के बाद ही मोदी सरकार हरकत में आयी और उसका साइड इफैक्ट SAIM का बैकफुट नजर आया।
क्या वाकई भारी प्रेशर था
आधिकारिक तौर पर भले ही इसे “रूटीन टेक्निकल बातचीत” बताया गया हो, लेकिन विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का मानना है कि यह शुद्ध रूप से प्रशासनिक दबाव (Administrative Duress) का नतीजा है। ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो कंपनियां सालों की रिसर्च के बाद कोई तकनीकी रिपोर्ट तैयार करती हैं, वे महज 24 घंटे में बिना किसी बाहरी दबाव या बड़ी घुड़की के अपने ही डेटा को “गलत या अपुष्ट” बताकर यू-टर्न नहीं ले सकतीं।
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