मुख्य सचिव व प्रदेश के पुलिस प्रमुख ने की कांवड़ यात्रा तैयारियों की समीक्षा
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मेरठ। कांंवड़ यात्रा की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे सूबे के मुख्य सचिव एसपी गोयल व पुलिस प्रमुख राजीव कृष्ण ने समीक्षा बैठक में शामिल होने से पहले कांवड़ यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने कांवड़ मार्ग (दिल्ली रोड, परतापुर) और औघड़नाथ मंदिर का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, तथा कमिश्नर कार्यालय सभागार में आला अधिकारियों के साथ हाईलेवल समीक्षा बैठक की। इस दौरान चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया था। मेरठ से हरिद्धार की ओर जाने वाले रास्ते पर जहां से मुख्य रूप से कांवड़ यात्रा गुजरती हैं वहां लखनऊ से आए इन दोनों आला अफसरों के मूवमेंट की वजह से यातायात को डायवर्ट कर दिया या फिर रोक दिया गया। वहीं दूसरी ओर इस महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। एसपी गोयल व राजीव कृष्ण का सरकारी विमान पहले हिंडन एयरपोर्ट पर उतरा वहां से सड़क मार्ग से दोनों अफसर मेरठ पहुंचे। बैठक में आगरा, मेरठ और बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद जोन के एडीजी, डीआईजी, रेलवे पुलिस के अधिकारी, विभिन्न जिलों के डीएम-एसएसपी और तीन पड़ोसी राज्यों के अधिकारी ऑनलाइन जुडे़। मेरठ से इस बैठक में एडीजी, कमिश्नर, डीआईजी, डीएम व एसएसपी के अलावा नगर निगम, प्राधिकरण, पीडब्लूडी, वन, पीवीएनएल, स्वास्थ्य, सप्लाई आदि विभागों के प्रमुख अफसर भी मौजूद रहे। मुख्य सचिव और डीजीपी ने तमाम अफसरों को दो टूक कहा कि जो मानक कांवड़ को लेकर तय किए गए हैं उनका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। पूर्व की कुछ घटनाओं का स्मरण दिलाते हुए बताया गया कि कांवड़ के लिए तय मानकों के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई हादसे को न्योता साबित हो सकती है। ऐसे ही निर्देश कांवड़ यात्रा में साथ चलने वाले डीजे को लेकर दिए गए। सबसे ज्यादा जोर डीजे की ऊंची आवाजों को नियंत्रित करने को लेकर दिया गया। उल्लेखनीय है कि डीजे की आवाज को लेकर जो पैनामा इस प्रकार की बैठकों में तय किया जाता है आमतौर पर उसका पालन मौके कराते हुए नहीं देखा जाता। लगभग 250 डीजे ऑपरेटरों के साथ हुई बैठक में स्पष्ट किया गया है कि डीजे की ऊंचाई 12 फीट और चौड़ाई 10 फीट से अधिक नहीं होगी।
तैयारियों की समीक्षा
मुख्य सचिव एसपी गोयल और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने बैठक में अफसरों ने उनके द्वारा अब तक किए गए इंतजामों की जानकारी ली। जिन जनपदों के अफसर ऑन लाइन जुड़े थे उनसे भी ब्योरा लिया गया। संवेदनशील स्थानों पर अधिकतम सीसीटीवी कैमरे लगाने और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गए। इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कंकरखेड़ा से दौराला तक 159 स्थायी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनमें कंकरखेड़ा क्षेत्र में 50, पल्लवपुरम में 46 और दौराला में 63 कैमरे शामिल हैं। इन कैमरों के जरिए कांवड़ मार्ग पर हर गतिविधि की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकेगा। दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे और गंगा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक संचालन को लेकर भी निर्देशित किया गया। इससे पहले डीएम डॉ. वीके सिंह और एसएसपी अविनाश पांडेय ने औघड़नाथ मंदिर पहुंचकर मंदिर समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। अधिकारियों ने सफाई, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा मंदिर में जलाभिषेक भी किया।
हादसों से सबक ना लेना अफसरों की आदत में शुमार
बीते सालों में अलग-अलग हादसों में भोले के 18 भक्तों की हुई है मौत, अनगिनत हुए थे घायल
मेरठ। कांवड़ यात्रा देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है, लेकिन बीते दो दशकों (2006-2026) में यह सफर कई बार भीषण हादसों और दर्दनाक मौतों का गवाह बना है। तेज रफ्तार वाहन, हाईटेंशन बिजली के तार और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियां हर साल दर्जनों शिवभक्तों की जान ले लेती हैं। प्रशासन द्वारा रूट डायवर्जन और सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद हादसों का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांवड़ यात्रा के दौरान ऊंचे डीजे, रथ और लोहे के पाइपों का उपयोग सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है, जो सड़कों के ऊपर से गुजर रही 11 केवी या उससे अधिक क्षमता की बिजली लाइनों की चपेट में आ जाते हैं।
लगातार जारी है हादसों का सिलसिला
मेरठ में साल 2023 में भावनपुर क्षेत्र के राली चौहान गांव में हरिद्वार से जल लेकर लौट रहे कांवड़ियों का वाहन सड़क के ऊपर लटक रही हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। इस भीषण हादसे में करंट लगने से 5 कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई और 10 से अधिक झुलस गए। साल 2024 में ब्रजघाट से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों के साथ हुए अलग-अलग सड़क हादसों में 3 कांवड़ियों की मौत हुई और 20 से अधिक घायल हो गए थे। इसी साल में बिजनौर और मुजफ्फरनगर के कई ऐसे डार्क जोन और तीव्र मोड़ हैं, जहां चेतावनी बोर्ड न होने के कारण कांवड़ियों की गाड़ियां फिसल जाती हैं। उदाहरण के लिए, 2024 में केवल 5 दिनों के भीतर बिजनौर मार्ग पर 4 कांवड़ियों की जान चली गई थी। साल 2025 में दिल्ली-मेरठ मार्ग पर कादराबाद चेक पोस्ट के पास एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार एम्बुलेंस ने कांवड़ियों की बाइक और स्कूटी को टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में 3 कांवड़ियों की मौत हो गई। साल 2025 में ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे हादसा (2025): हरिद्वार और केदारनाथ से लौट रहे कांवड़ियों की मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई, जिससे 3 शिवभक्तों की मौके पर ही मौत हो गई।
बीते 20 वर्षों का इतिहास बताता है कि जब तक सड़कों के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों को अंडरग्राउंड नहीं किया जाता और डाक कांवड़ वाहनों की गति सीमा तय नहीं की जाती, तब तक आस्था के इस मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बना पाना असंभव है।
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