अगले दिन यानी पंचमी तिथि पर चंद्रमा के दर्शन जानबूझकर पूरे सम्मान के साथ करने चाहिए
नई दिल्ली। हिन्दू धर्म मान्यताओं के अनुसार गणेश चर्तुदशी के रोज किसी भी स्थिति में चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। ज्योतिषियों का कहना है कि यदि मानही के बाद भी और इस बात की जानकारी होते हुए भी कोई शख्य चंद्रमा के दर्शन करता है तो उसका अनिष्ट तय है। इसलिए किसी भी दशा में चंद्रमा के दर्शन गणेश चर्तुदशी को ना करें। कुछ परिवारों और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, अगर चतुर्थी के दिन गलती से चांद दिख जाए, तो उसके अगले दिन यानी पंचमी तिथि पर चंद्रमा के दर्शन जानबूझकर पूरे सम्मान के साथ करने चाहिए। ऐसा करने से पहले दिन का ‘आक्समिक दर्शन’ का दोष संतुलित होता है। चंद्रमा के दर्शन करना निषेध माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि के दिन एक बार चंद्रदेव ने गणेशजी के स्वरूप का उपहास किया था। तब उन्होंने क्रोधित होकर चंद्रमा को क्षय होने का शाप दे दिया। मान्यता है कि इस दिन अगर कोई भूले से चांद के दर्शन कर ले तो उस मनुष्य पर मिथ्या कलंक लग सकता है। हालांकि, अनजाने में हुई इस गलती को ठीक करने का उपाय भी शास्त्रों में बताया गया है। ऐसे में अगर आप गलती से चंद्रमा को देख लें, तो घबराएं नहीं। शास्त्रों में इस दोष को तुरंत दूर करने के बेहद प्रभावी उपाय और नियम बताए गए हैं। जिससे कलंक दोष को दूर किया जा सकता है। तो चलिए विस्तार से जानें कि गणेश चतुर्थी पर गलती से चांद दिख जाए, तो क्या करना चाहिए। जानें शास्त्रों के अनुसार सरल और प्रभावी उपाय।
गणपति की आराधना
गणपति बप्पा के सामने धूप-दूप आदि जलाकर उनसे अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें और साथ ही, उन्हें मोदक व फल जरूर अर्पित करें। इन उपायों को श्रद्धा भाव के साथ करने से बप्पा आपके संकटों और झूठे आरोपों से भी रक्षा कर सकते हैं।
दुर्बा के मुकुट से प्रसन्न होते विध्नहर्ता
गणेश चतुर्थी पर 21 दूर्वा लेकर उसे मौली से बांधकर एक छोटा मुकूट या गुच्छा बनाएं। इस मुकूट को भगवान गणेश के मस्तक पर अर्पित कर दें। माना जाता है कि मुकूट में अमृत तत्व होता है जो हर प्रकार के दोष को अपने अंदर सोख लेता है। इससे गणपति प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा इस दिन एक तांबे या चांदी के पात्र में जल लेकर उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध और चंदन मिला लें। फिर, शिवलिंग पर ‘ओम नम: शिवाय’ मंत्र का जप करते हुए अभिषेक करें। ऐसा करने से आपको शुभ लाभ प्राप्त हो सकता है।
इन मंत्रों से करें उपासना
महादेव शिव के मंदिर में बैठकर ‘ओम श्रां श्रीं श्रूं सः चन्द्रमसे नमः’ मंत्र का जाप करें। चंद्रदेव के इस मंत्र का जप कम से कम 108 बार अवश्य करना चाहिए। ‘सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः, सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः।’ शास्त्रों के अनुसार, इस तुरंत मिथ्या कलंक निवारण मंत्र का कम से कम 21, 54 या 108 बार जप जरूर करना चाहिए। श्रीमद्भागवत गीता के 10वें खंड (अध्याय 56-57) में दी गई स्यमंतक मणि चोरी की कथा को ध्यानपूर्वक सुनें या उसका पाठ करें।
ये करें
चंद्रमा का संबंध सफेद रंग और चांदी से माना जाता है। ऐसे में कलंक दोष के दुष्प्रभाव से बचाव के लिए किसी जरूरतमंद को मंदिर में सफेद चीजों का दान करें। आप चावल, दूध, मिश्री, सफेद वस्त्र आदि का दान कर सकते हैं। यदि कुंडली में चंद्रमा की स्थिति कमजोर हो या चतुर्थी के दर्शन से मानसिक तनाव बढ़ रहा हो, तो नियमित रूप से चांदी के गिलास में पानी पीना चाहिए। ऐसा करने से मन शांत होता है और कलंक दोष के कारण होने वाली परेशानी का योग टल सकता है।
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