मेघालय, नागालैंड, मिजोरम) और गोवा या केरल जैसे राज्यों बीफ यमी! उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात में गोवंश मम्मी
नई दिल्ली। बीफ के नाम पर देश भर में माॅवलिचिंग सरीखी घटनाएं तक हो चुकी हैं। बीफ के विरोध के नाम पर भाजपा के नेता खुद को ब्रांड एम्बेसेडर बताते नहीं थकते हैं, लेकिन बीफ को लेकर भाजपा के नेताओं को डबल स्टैंड किसी से छिपा भी नहीं है। भारतीय राजनीति में खान-पान और बीफ (गोमांस) को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं, और विपक्षी दल भाजपा (BJP) पर इस मुद्दे को लेकर “दोहरे मापदंड” (Double Standards) अपनाने का आरोप लगाते हैं। इस विषय पर देश के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताओं के कारण भाजपा के नेताओं के बयानों में भिन्नता देखी गई है। हालांकि भाजपा के कुछ नेता स्वीकार करते हैं कि चुनावी राजनीति में ऐसा किया जाना मजबूरी होता है।भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के प्रवक्ताओं का इस पर यह तर्क रहता है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में वहां की भौगोलिक स्थिति, कानून और सांस्कृतिक प्रथाओं के अनुसार नीतियां तय की जाती हैं।
इन राज्यों में बीफ यमी!
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (जैसे मेघालय, नागालैंड, मिजोरम) और गोवा या केरल जैसे राज्यों में ईसाई और जनजातीय आबादी अधिक है, जहां बीफ खाना वहां की संस्कृति और जीवनशैली का हिस्सा है। इन राज्यों में भाजपा के तमाम नेता उत्तर के राज्यों के इतर बीफ की पैरवी खुलकर करते हैं और बताते हैं कि वो बीफ खाते हैं। मेघालय भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री सनबोर शुलई ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि लोगों को चिकन-मटन से ज्यादा बीफ खाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि लोकतांत्रिक देश में कोई किसी के खान-पान पर अपनी मर्जी नहीं थोप सकता। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी एक बार कहा था कि भारत विविधताओं का देश है और जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं वहां गौवंश संरक्षण के कानून बन सकते हैं, लेकिन इसे पूर्वोत्तर के राज्यों पर नहीं थोपा जा सकता।
इन राज्यों में मम्मी
इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में भाजपा का रुख बेहद सख्त रहता है। इन राज्यों में गौवंश संरक्षण और गोमांस पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित कई नेताओं ने समय-समय पर बयान दिए हैं कि बहुसंख्यक समाज की धार्मिक भावनाओं (गाय को माता मानने की आस्था) का सम्मान करते हुए गोमांस के सेवन से बचना चाहिए। विपक्षी दलों (जैसे कांग्रेस, टीएमसी और वामपंथी दल) का आरोप है कि भाजपा राजनीतिक फायदे के लिए दोहरा रुख अपनाती है—एक तरफ जहां उत्तर भारत में बीफ को लेकर कड़े कानून हैं और ध्रुवीकरण की राजनीति होती है, वहीं पूर्वोत्तर में चुनाव जीतने और स्थानीय जनता को रिझाने के लिए भाजपा नेता खुद बीफ खाने का समर्थन करते हैं।
Leave a comment