रास्ते में पुष्प वर्षा से स्वागत, नांदणी मठ में माधुरी के लिए किए गए हैं खास इंतजाम, मेरठ के भी जैन समाज में हर्ष
नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट में जैन समाज और पेटा/एनिमल राइटस एक्टिविस्ट को लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार गुड न्यूज एक दिन पहले मिली। उसके बाद अब हथनी माधुरी गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से नांदणी मठ के लिए रवाना हुई और दो दिनों का सफर पूरा कर आज ही कोल्हापुर और अपने नांदणी मठ जो उसका घर वहां पहुुंच गयी। हथिनी नंदनी को यहां देवताओं की भांति पूजा जाता है। अपने घर लौटने पर माधुरी की खुशी को अच्छी तरह से समझा जा सकता था। पूरे कोल्हापुर जिले और नांदणी गांव में किसी बड़े त्योहार जैसा माहौल है। जैन समाज और स्थानीय निवासियों ने उसकी अगवानी के लिए भव्य पलक-पावड़े बिछाए हुए थे। नंदनी को मठ तक पहुंंचाने में मेरठ के जैन समाज से सुदीप जैन के प्रयासों काे अनदेखा नहीं किया जा सकता। सुदीप जैन ने काफी लंबी लड़ाई नंदनी के लिए लड़ी। इस खबर से जैन समाज समेत सर्व समाज में खुशी का माहौल है। विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुदीप जैन ने इसे लंबे संघर्ष की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि ने बताया कि माधुरी का मामला केवल जैन समाज का विषय नहीं था। यह अहिंसा, पशु संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा विषय था। यह उस जनभावना की जीत है, जो लोकतांत्रिक और सांविधानिक तरीके से अपनी बात उठा रही थी। इस संघर्ष में जैन समाज के साथ सर्व समाज के लोगों ने एकजुट होकर आवाज उठाई। यह एकजुटता अपने आप में ऐतिहासिक है। नांदणी मठ के पीठाधीश स्वस्ति जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के मार्गदर्शन में वापसी के लिए आवाज उठाई गई थी। यह संघर्ष धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप ले गया। पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने आंदोलन को जमीन पर मजबूत नेतृत्व दिया। उन्होंने कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि कमेटी के आदेशानुसार माधुरी को अब किसी धार्मिक जुलूस (शोभायात्रा) या व्यावसायिक काम में शामिल नहीं किया जाएगा। मठ में ही उसके लिए हाइड्रोथेरेपी और लेज़र थेरेपी जैसी आधुनिक सुविधाओं वाला नया शेल्टर बनाया जा रहा है, जिसकी देखरेख में वनतारा की टीम भी सहयोग करेगी।
रिलायंस के ‘जियो’ (Jio) नेटवर्क का बहिष्कार
गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा (Vantara) वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र के मालिक रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन (Reliance Foundation) हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट उद्योगपति मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी (Anant Ambani) का ड्रीम प्रोजेक्ट और दिमागी उपज है, जो रिलायंस के बोर्ड निदेशक भी हैं। माधुरी पिछले 30 से अधिक वर्षों से कोल्हापुर के नांदणी मठ में थी और स्थानीय लोग व जैन समाज उसे अपने परिवार के सदस्य और पूजनीय देवता की तरह मानते थे। जब उसे वनतारा ले जाया गया, तो महाराष्ट्र के कोल्हापुर और शिरोळ इलाकों में बहुत बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो गया। लोगों ने शांति मार्च निकाले, उपवास रखे और यहाँ तक कि रिलायंस के ‘जियो’ (Jio) नेटवर्क के बहिष्कार की भी घोषणा कर दी थी। भारी विरोध के बाद वनतारा और अंबानी परिवार ने भी एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि अदालत और हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) हथिनी को वापस भेजने की अनुमति देते हैं, तो उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है और वे पूरी मदद करेंगे।
ये दी जा रही सफाई
भाजपा, मोदी सरकार या महाराष्ट्र सरकार ने किसी उद्योगपति की मदद के लिए हथिनी को वनतारा नहीं भेजा था, बल्कि कोर्ट के आदेश पर उसे इलाज के लिए भेजा गया था। बाद में जब जनता का आक्रोश और जैन समाज की आस्था का सवाल सामने आया, तो सरकार और स्वयं वनतारा संस्थान ने मिलकर आपसी सहमति और कोर्ट की कमेटी (HPC) के जरिए हथिनी की नांदणी मठ में सुरक्षित वापसी का रास्ता साफ किया।
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