Home Delhi एफआईआर को सही बताए जाने को बताया जा रहा गलत
Delhi

एफआईआर को सही बताए जाने को बताया जा रहा गलत

एफआईआर को सही बताए जाने को बताया जा रहा गलत

Share
Share

सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने पर एफआईआर को सही ठहराए जाने को बताया जा रहा है गलत

नई दिल्ली/मेरठ।नीति आयोग और आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, पिछले एक दशक में पूरे भारत में लगभग 94,000 सरकारी स्कूल बंद या अन्य स्कूलों में मिलाए (मर्ज) जा चुके हैं, और अकेले उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से 26 हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल बंद या मर्ज हुए हैं। सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने पर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में दर्ज हुई एफआईआर (FIR) और वीडियोग्राफी पर लगे प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख ने देश में एक बड़ी वैधानिक और नैतिक बहस को जन्म दे दिया है। इसे शिक्षा के अधिकार, नागरिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक अनुशासन के तराजू पर अलग-अलग नजरियों से देखा जा रहा है। सरकारी स्कूल सार्वजनिक धन से चलते हैं। आलोचकों का मानना है कि यदि जनता, पत्रकार या सामाजिक कार्यकर्ता स्कूलों की कमियां (जैसे जर्जर छतें, शिक्षकों की अनुपस्थिति, गंदे शौचालय) उजागर नहीं कर पाएंगे, तो प्रशासन और स्कूल प्रबंधन अपनी मर्जी से काम करेंगे और उनकी जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो जाएगी। ग्राउंड स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन इस आदेश की आड़ में उन लोगों को जेल भेज रहा है जो वास्तव में बच्चों के हक की आवाज उठा रहे हैं। जब तक समस्या सामने नहीं आएगी, तब तक उसमें सुधार कैसे होगा। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। आलोचकों का तर्क है कि सरकारी व्यवस्था की कमियों को दिखाना एक नागरिक का मौलिक कर्तव्य और अधिकार है, और इस पर प्रतिबंध लगाना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक पारदर्शी व्यवस्था के लिए सरकार को पत्रकारों और अभिभावकों को निरीक्षण की अनुमति देने की एक सरल और स्पष्ट प्रक्रिया बनानी चाहिए, ताकि सुरक्षा भी बनी रहे और स्कूलों की वास्तविक स्थिति भी छिपी न रहे।

स्याह है स्कूलों की सच्चाई

अगस्त 2026 में मेरठ के खरखौदा क्षेत्र के पांची गांव का एक वीडियो और छात्राओं की भावुक अपील सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई. छात्राओं ने मेरठ के जिला अधिकारी (DM) से गुहार लगाई कि स्कूल जाने वाले रास्ते के रेलवे अंडरपास में इतना गहरा पानी भरा है कि वे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। अगस्त 2026 में मेरठ के ग्रामीण क्षेत्रों में चलाए गए ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के तहत चार प्रमुख सरकारी विद्यालयों का बुनियादी ढांचा ऑडिट किया गया था. इस औचक निरीक्षण के दौरान ग्राउंड टीम को स्कूलों में भारी अव्यवस्थाएं मिलीं, जिनमें शामिल हैं। कई स्कूलों में बिजली का कनेक्शन न होना, क्लासरूम में अत्यधिक गंदगी और दीवारों पर जाले लगे होना आम बात पाई गई। पेयजल स्थलों और शौचालयों की स्थिति बेहद बदतर मिली. इसके अलावा, स्कूल परिसरों के पिछले हिस्सों में ऊंची झाड़ियां उगी होने के कारण सांप और अन्य जहरीले कीड़ों का खतरा बना रहता है।

कंडम भवनों में पढ़ाई क्यों

ऑपरेशन कायाकल्प के भारी-भरकम बजट के बावजूद मेरठ के कतिपय दूरदराज के इलाकों में पुराने स्कूल भवन आज भी ‘जर्जर’ (कंडोम) घोषित हैं। नई इमारतों का निर्माण न होने के कारण छात्र टूटी छतों और उखड़े हुए प्लास्टर के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कई बार सुरक्षा कारणों से बच्चों की कक्षाएं खुले आसमान के नीचे या पंचायत भवनों के एक कमरों में शिफ्ट करनी पड़ती हैं। स्कूलों की बदहाली का मुद्दा उस समय और अधिक गरमा गया जब 24-25 अगस्त 2026 को मेरठ पुलिस ने एक सरकारी स्कूल की बदहाली का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में कार्रवाई की। । 5 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के मौके पर स्कूल के गंदे शौचालयों, बिजली की अनुपलब्धता और झाड़ियों की जमीनी सच्चाई दिखाई थी। सरकार द्वारा हाल ही में सरकारी स्कूलों के अंदर बिना अनुमति के वीडियो बनाने पर लगाई गई रोक के बाद यह सख्त कार्रवाई हुई है. इसके कारण विपक्ष और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सरकार कमियों को सुधारने के बजाय सच को दबाने की कोशिश कर रही है।
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

nine + 20 =

Related Articles

नांदणी मठ पहुंची हथनी माधुरी का शानदार स्वागत

नांदणी मठ पहुंची हथनी माधुरी का शानदार स्वागत

ट्रंप का पैसों का लालच देकर वोट मांगना अपराध की श्रेणी में

ट्रंप का पैसों का लालच देकर वोट मांगना अपराध की श्रेणी में

स्वामी नारायण संप्रदाय में महिलाएं अछूत क्यों

स्वामी नारायण संप्रदाय में महिलाएं अछूत क्यों