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शास्त्रीनगर में मकानों के सैटबैक तोड़े लोगों में डर और दहशत

शास्त्रीनगर में मकानों के सैटबैक तोड़े लोगों में डर और दहशत

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शास्त्रीनगर में मकानों के सैटबैक तोड़े लोगों में डर और दहशत
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मेरठ। शास्त्रीनगर वालों को जिसका डर था वही हुआ। भाजपा के जो नेता कहते थे परेशान मत हो मैं हूं ना वो नजर नहीं आए। मकानों को बचाने की तमाम कवायदे धरी की धरी रह गई ना तो सुप्रीमकोर्ट में दायर की गयी अर्जी काम आयी ना ही भगवान ने मदद की। वहीं हुआ जो अफसर चाहते थे। मकानों के सैटबैक तोड़ने के लिए सुप्रीमकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में शास्त्रीनगर सैंट्रल मार्केट से सटे मकानों के आगे व पीछे के हिस्से तोड़े गए। इस कार्रवाई से तमाम 815 वो परिवार बुरी तरह से डरे हुए हैं जिनको आवास विकास परिषद ने नोटिस थमाए हुए हैं। उनके सामने अब अपने आशियानों को जमीदोज होते देखने के अलावा कोई चारा नहीं। यहां तक कि विरोध तो दूर आवाज उठाने पर सलाखों के पीछे यानि जेल भेज दिए जाने की धमकियां दी जा रही हैं। लोग उस वक्त उस घड़ी को कोस रहे हैं जब उन्होंने जिंदगी भर की जमा पूंजी लगाकर आवास विकास परिषद से प्लाट या फ्लैट खरीदे थे। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की शुरूआत फरार चल रहे हिस्ट्रीशीटर अमित मिरिंडा के मकान पर बुलडोजर चलाने से हुई। उसके मकान का आगे का हिस्सा बुलडोजर कर दिया गया। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में अमित मिरिंडा का दो मंजिला मकान है। बताया जा रहा है कि आवास विकास की टीम ने सेटबैक एक्शन के तहत मिरिंडा के मकान पर बुलडोजर चलाया है। इस मकान के एक बड़े हिस्से को अवैध निर्माण बताकर ध्वस्त कर दिया गया।

भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में कार्रवाई

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भारी पुलिस बल की मौजदूगी में हुई सबसे हैरानी की बात ताे यह कि कार्रवाई अचानक की गयी। लोगों को भनक तक नहीं लगाने दी गयी। वर्ना आमतौर पर होता यह है कि इस प्रकार की कार्रवाई की आहट पहले ही सुनवाई देने लगती है। लेकिन अफसरों ने बेहद सावधानी बरती और भनक तक नहीं लगने दी गयी। दो बुलडोजर यानि जेसीबी और भारी पुलिस फोर्स के साथ आवास विकास के जेई अभिषेक राज मौके पर जब पहुंचे तो लोगों ने उन्हें घेर लिया लेकिन जब पुलिस वाले आगे बढ़े तो घेरने वाले पीछे हटते चले गए। हालांकि इसके बाद भी जितना भी कर सकते थे लोगों ने विरोध किया, लेकिन उनका विरोध ध्वस्तीकरण को नहीं रोका सका। कुछ ने आरोप लगाया कि सलेक्टिव कार्रवाई की जा रही है। मेडिकल स्टोर चलाने वाले मसरूर अली ने कहा कि चार-चार मंजिला कंपलेक्स यहां चल रहे हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है लेकिन एक भेदभाव के तहत हमारी दुकानों पर कार्रवाई की जा रही है जो लोग मोटा पैसा भर रहे हैं उनकी दुकानों को छोड़ा जा रहा है। सेंट्रल मार्केट के आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को आवासीय परिसरों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश दिए थे। आवास विकास अफसरों का कहना है कि उसी के अनुपाल में ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। अगली सुनवाई 14 जुलाई को होनी है। आवास विकास की आज की कार्रवाई से लोग डर और दहशत में हैं। गाए हुए हैं, जबकि अधिकारी न्यायालय के आदेशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटे हैं।
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