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अफसरों पर कार्रवाई की बात करने वाले कार्रवाई नहीं करा सके

अफसरों पर कार्रवाई की बात करने वाले कार्रवाई नहीं करा सके

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अफसरों पर कार्रवाई की बात करने वाले कार्रवाई नहीं करा सके
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मेरठ। सुप्रीमर्ग्ट के आदेशों के नाम पर शासत्रीनगर के मकानों के सैटबैक तोड़े जा रहे हैं। जिन आदेशों की बात कही गयी है उनमें आवास विकास परिषद के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गयी है, लेकिन सजा केवल पब्लिक को दी जा रही है, आवास विकास के जो अफसर इस सब के लिए कसूरवार हैं, जिनके खिलाफ खुद आवास विकास परिषद के अफसरों ने थाना नौचंदी में एफआईआर दर्ज कराई है उन पर कार्रवाई की बात तो ना तो अफसर कर रहे हैं और ना नही वो नेता जब शास्त्रीनगर में जब धरना चल रहा था वो आस्तीन चढ़ा कर कहते थे कि मैं हूं ना ध्वस्तीकरण तो दूर की बात मकान की कोई एक ईंट भी ना छू पाएगा। घड़ियाली आंसू महिलाओं के सामने बहाया करते थे। इन मकानों के बनने में कूसरवार आवास विकास परिषद के अफसरों को बचाने के लिए अफसरों की तरकीबों की बात तो समझ में आती है, लेकिन भाजपा और व्यापार संघ के जो नेता कहते थे कि जिन अफसरों पर एफआईआर लिखी गयी है उन पर कार्रवाई करा कर ही दम लेंगें वो कहां हैं। क्या हुआ उनका वादा अब तो सरकार भी उनकी पार्टी की है या यह मान लिया जाए कि उन अब उनकी ही पार्टी की सरकार में सुनवाई नहीं हो रही है। उनकी बात ना अफसर सुनने को तैयार है ना सरकार। वो केवल शास्त्रीनगर वालों से पिंड छुडाने के लिए ही नामजद अफसरों पर कार्रवाई की बातें किया करते थे।

कोई नहीं आया झांकने

शास्त्रीनगर में जिस वक्त मकानों के सैटबैक तोड़ने के नाम पर जेसीबी गरज रही थी उस वक्त जिनके आशियाने तोड़े जा रहे थे उनके आंसू पूछने ना तो भाजपा नेता आए और ना ही व्यापार संघ के वो आए जो नामजद अफसरों पर कार्रवाई कराए जाने का दम भरते घूमते थे। इन लोगों को मुसीबत की इस घड़ी में नेताओं ने उनके हाल पर छोड़ दिया है। इस कार्रवाई के बाद तमाम ऐसे घर परिवार बताए जा रहे हैं जिनके यहां दहशत के चलते चूल्हा तक नहीं चढ़ा सबको इसी बात का डर है ना जाने कब उनका नंबर आ जाए। क्योंकि यह भी तय है कि नंबर आना सबका है। किसी का पहले किसी का बाद में बचेगा कोई नहीं। ना सरकार से मदद मिलेगा और संगठन मदद को आगे आएगा इसके भी कोई आसार नजर आ रहे हैं।

शास्त्रीनगर सैंट्रल मार्केट प्रकरण में सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना और अवैध निर्माण के मामले में थाना नौंचदी में उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के आवास एवं विकास परिषद के कुल 67 इंजीनियरों और अधिकारियों के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं। पहली एफआईआर में 45 अधिकारी और दूसरी एफआईआर में 22 अधिकारी नामजद हैं। इन अधिकारियों पर आवासीय भूखंडों पर अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, स्कूल और अस्पताल बनवाने का आरोप है। इन पर इन अधिकारियों पर आवासीय भूखंडों पर अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, स्कूल और अस्पताल बनवाने के अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना, अवैध निर्माण को बढ़ावा देना और सरकारी काम में बाधा डालना आदि आरोप हैं।

कार्रवाई के इंतजार में चार की मौत

15 अक्तबूर 2025 को दर्ज कराई गयी एफआईआर में  45 अधिकारियों पर दर्ज हुई जिनकी तैनाती 1990 से अब तक मेरठ कार्यालय में रही। विभाग की कमेटी की जांच रिपोर्ट में 49 अधिकारियों की ड्यूटी के प्रति लापरवाही सामने आई थी। इनमें से चार की मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को सेंट्रल मार्केट के आवासीय भूखंड संख्या 661/6 पर बने व्यावसायिक काम्पलेक्स को तीन महीने में खाली कराने तथा उसके बाद आवास विकास के अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर इसे ध्वस्त करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे प्रदेश में आवासीय भूखंडों पर बने व्यावसायिक भवनों पर भी यही समान कार्रवाई करने का आदेश दिया था।  शास्त्रीनगर में आवास विकास ने आवासीय भूखंडों पर बने 1,482 व्यवसायिक भवनों को चिह्नित कर रखा है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का पालन न होने पर सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। शीर्ष कोर्ट ने छह अक्टूबर को सुनवाई हुई याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने गृह सचिव, आवास आयुक्त, एसएसपी मेरठ, नौचंदी थाना प्रभारी तथा नौ व्यापारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा। आवास विकास की रिपोर्ट के मुताबिक इस स्कीम में 6,379 स्वीकृत आवासीय संपत्तियां हैं। इनमें से 860 संपत्ति ऐसी हैं, जिनमें व्यावसायिक काम्पलेक्स बन गए

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