Home मेरठ जगन्नाथ मंदिर सदर की संपत्ति माल खाने में जमा
मेरठ

जगन्नाथ मंदिर सदर की संपत्ति माल खाने में जमा

जगन्नाथ मंदिर सदर की संपत्ति माल खाने में जमा

Share
जगन्नाथ मंदिर सदर की संपत्ति माल खाने में जमा
Share
मेरठ। मेरठ के सदर बाजार क्षेत्र में स्थित श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर एक बेहद प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर ऐतिहासिक रूप से बिल्वेश्वर महादेव मंदिर (सदर थाने के पीछे) से जुड़ा हुआ है। सदर बाजार स्थित सार्वजनिक भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। वाद संख्या 7541/2024, कंप्यूटरीकृत वाद संख्या 202411520007541, अंतर्गत धारा 145 दंप्रसं में विजय गोयल, सुरेन्द्र सिंधु और पवन गर्ग बनाम राजेन्द्र वर्मा, दिनेश गुप्ता और राम मोहन शर्मा के बीच चल रहे निजी विवाद का असर सीधे सार्वजनिक मंदिर और उसकी संपत्ति पर पड़ गया।

मंदिर की संपत्ति निजी विवाद का हिस्सा कैसे

प्रकरण में गंभीर सवाल यह है कि जब विवाद इन छह निजी व्यक्तियों के बीच था, तो सदर स्थित भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर, उसकी पूजा व्यवस्था, दान-पात्र, पूजा-सामग्री, अभिलेख और अन्य धार्मिक संपत्ति इस निजी विवाद का हिस्सा कैसे बन गई। उक्त छहों व्यक्तियों का मंदिर के स्वामित्व, वास्तविक कब्जे, सार्वजनिक धार्मिक प्रबंधन या मंदिर की संपत्ति से कोई स्पष्ट विधिक संबंध सामने नहीं आया है। इसी मामले में कुर्की आदेश संख्या 58/पेशकार रशीद/सदर/2026 दिनांक 17.03.2026, अंतर्गत धारा 146(1) दं0प्र0सं0, न्यायालय अपर नगर मजिस्ट्रेट सदर, मेरठ द्वारा पारित किया गया। आदेश के अनुपालन में रिसीवर/तहसीलदार दीपक नागर सदर बाजार थाना प्रभारी और उपनिरीक्षकों के साथ मंदिर परिसर पहुँचे। बताया गया कि पुलिस उपस्थिति में मंदिर का दान-पात्र खोला गया, उसमें रखा चंदा रिसीवर द्वारा अपनी अभिरक्षा में लिया गया, दान-पात्र को सील किया गया तथा मंदिर से संबंधित अन्य वस्तुओं को भी सील कर कब्जे में लिया गया।

श्रद्धालुओं में बेचैनी

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सार्वजनिक धार्मिक मंदिर की संपत्ति और संबंधित सामग्री को सदर थाने के मालखाने में दर्ज कर दिया गया। इससे स्थानीय श्रद्धालुओं में यह प्रश्न उठ रहा है कि निजी व्यक्तियों के आपसी विवाद में भगवान के मंदिर की संपत्ति थाने के मालखाने तक कैसे पहुँची। इसको लेकर श्रद्धालुओं में खासी बैचेनी है। भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर कोई निजी दुकान, मकान या व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। यह सार्वजनिक आस्था और धार्मिक उपयोग का स्थल है। ऐसे में विजय गोयल, सुरेन्द्र सिंधु, पवन गर्ग, राजेन्द्र वर्मा, दिनेश गुप्ता और राम मोहन शर्मा जैसे निजी पक्षकारों के विवाद को सार्वजनिक मंदिर तक विस्तारित किया जाना पूरे प्रकरण को संवेदनशील और विवादास्पद बनाता है। मामले का मुख्य सवाल अब यही है कि उपरोक्त छ: निजी व्यक्तियों के बीच धारा 145 एवं 146 (1) दं.प्र.सं. का विवाद सार्वजनिक मंदिर पर कैसे लागू हुआ, मंदिर/देवता/वास्तविक प्रबंधन या श्रद्धालुओं को इस कार्यवाही में किस रूप में सुना गया, और मंदिर की दानराशि व संपत्ति को थाने के मालखाने में दर्ज करने की नौबत किन परिस्थितियों में आई।
Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

twenty − six =

Related Articles

आज का राशिफल

आज का राशिफल

LLRM मेडिकल में सीपीआर प्रशिक्षण का समापन

LLRM मेडिकल में सीपीआर प्रशिक्षण का समापन

प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मानित किया

प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मानित किया

सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जयंती बनाई

सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जयंती बनाई