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उत्तराखंड: केदारनाथ में श्रद्धा का सैलाब, 10 लाख पार श्रद्धालु; चारधाम यात्रा में अब तक 28 लाख से अधिक पहुंचे भक्त

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Uttarakhand : केदारनाथ धाम में उमड़ रहा भक्तों का सैलाब, 10 लाख पार हुआ  श्रद्धालुओं का आंकड़ा - Khabar Uttarakhand - Latest Uttarakhand News In  Hindi, उत्तराखंड समाचार

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा इस वर्ष श्रद्धालुओं की रिकॉर्डतोड़ भीड़ के साथ अपने चरम पर है। कठिन मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद भी 42 दिनों में केदारनाथ धाम में 10 लाख से अधिक भक्तों ने बाबा केदार के दर्शन किए हैं। यह आस्था का एक ऐतिहासिक उदाहरण बन चुका है।

केदारनाथ धाम

2 मई को कपाट खुलने के बाद से अब तक 10,18,540 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। अकेले 13 जून को ही 24,509 भक्तों ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।

यमुनोत्री धाम

चारधाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है। 30 अप्रैल से अब तक 4,60,335 श्रद्धालु मां यमुनोत्री के दर्शन कर चुके हैं। 13 जून को 10,840 भक्त पहुंचे।

गंगोत्री धाम

गंगोत्री में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक 4,63,332 श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन कर चुके हैं। 13 जून को यहां 11,923 यात्रियों ने पूजा की।

बदरीनाथ धाम

चारधाम का अंतिम पड़ाव बदरीनाथ धाम है। यहां अब तक 7,90,913 श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर चुके हैं। 13 जून को 19,544 यात्रियों ने मंदिर में आस्था जताई।

हेमकुंड साहिब

सिख श्रद्धालुओं के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट 25 मई को खुले। अब तक 1,01,838 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि 13 जून को 6,178 लोग यहां पहुंचे।

कुल आंकड़ा

अब तक (13 जून तक) चारधाम यात्रा में 28,35,958 श्रद्धालु शामिल हो चुके हैं, जिसमें हेमकुंड साहिब की यात्रा करने वाले श्रद्धालु भी शामिल हैं। 13 जून के दिन कुल 72,994 तीर्थयात्रियों ने चारधाम यात्रा की।

प्रशासन की तैयारी

जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए चिकित्सा, जल, भोजन, आवास और सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके। यह आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है, और चारधाम यात्रा केवल एक आध्यात्मिक अनुभव नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बन चुकी है।

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