स्ट्रीट डॉग की निपटने के निगम के इंतजाम बेहद नाकाफी
स्ट्रीट डॉग की निपटने के निगम के इंतजाम बेहद नाकाफी
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सुप्रीमकोर्ट के स्ट्रीट डॉग को शैल्टर होम में रखे जाने या मर्सी डेथ देने के आदेश, प्रतिदिन तीन सौ डॉग बाइट के केस पहुंचते हैं जिला अस्पताल में
मेरठ। महानगर में डेंजरस हो चुके स्ट्रीट डॉग की समस्या विकट हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद नगर निगम की इन डेंजरस डॉग को लेकर मुहिम बेइंतहा सुस्त है। सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों (विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों) की सुरक्षा सर्वोपरि है और कुत्तों की कीमत पर इंसानों की जान को नहीं आंका जा सकता । कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए इस संबंध में निर्देशों के अनुसार काम किया जाए।
रोज़ाना तीन सौ से अधिक लोग डॉग बाइट्स का शिकार होकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं, लेकिन निगम की ओर से नसबंदी और स्ट्रीड डॉग को हटाने की कार्रवाई फाइलों तक ही महफूज नजर आती हे। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों से डेंजरस स्ट्रीट डॉग को हटाया जाए। गंभीर रूप से आक्रामक या रेबीज से पीड़ित स्ट्रीट डॉग को प्रोटोकॉल के अनुसार शेल्टर होम में रखने या हटाने के निर्देश हैं। अदालत ने भी माना है कि स्ट्रीट डॉग का आतंक किसी से छिपा नहीं है। गलियों, मोहल्लों और कॉलोनियों में घूमते बेसहारा कुत्ते रोजाना लोगों को काट रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमले आम हो चुके हैं। जिला अस्पताल में रेबीज इंजेक्शन के लिए लंबी कतारें इस बात की गवाही दे रही हैं कि हालात कितने भयावह हो चुके हैं। सवाल यह है कि जब शासन हर साल करीब एक करोड़ रुपये नगर निगम को आवारा स्ट्रीट डॉग की समस्या से निपटने के लिए दे रहा है फिर भी महानगर के लोग डेंजरस हो चुके स्ट्रीट डॉग की दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। हाल दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में कुत्ते काटे के केसों के बढ़ने की आशंका जतायी जा रही हे।
महानगर में करीब डेढ़ लाख स्ट्रीट डॉग नगर निगम के आंकड़ों में हैं। कमेला रोड पर 23 मार्च से शुरू हुए नए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर की क्षमता प्रतिदिन 100 कुत्तों के आपरेशन की है, लेकिन यहां औसतन प्रतिदिन 33 स्ट्रीट डॉग का ही बंध्याकरण हो पा रहा है। यानी अपनी कुल क्षमता का एक-तिहाई भी इस्तेमाल नहीं हो रहा। नए सेंटर में 23 मार्च से 15 मई तक केवल 1600 स्ट्रीट डॉग का ही वैक्सीनेशन और बंध्याकरण हुआ है।
महानगर में स्ट्रीट डाॅग के लिए नगर निगम के दो शेल्टर होम हैं। एक परतापुर में है जो पहले से चल रहा है लेकिन इन दिनों बंद बताया जा रहा है और दूसरा हापुड़ रोड पुराने कमेले के पास बनाया गया है। हालांकि नगर निगम का शंकर नगर स्थित पुराना एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बंद चल रहा है। इसका ठेका श्याम हेल्पिंग इनसाइट कंपनी को था। ठेके की अवधि पूरी हो गई है। नया ठेका एनिमल केयर फाउंडेशन का हुआ है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अमन सिंह ने बताया कि इस सेंटर में प्रतिदिन 30 स्ट्रीट डॉग के आपरेशन करने की क्षमता है। दो सेंटरों के सक्रिय होने से स्ट्रीट डॉग के बंध्याकरण दोगुना हो जाएगा। नगर निगम का परतापुर थाना क्षेत्र के शंकर नगर फेस-2 में एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाया गया था। इसका मकसद स्ट्रीट डॉग की समस्या को दूर करना है, उनकी नसबंदी किए जाने के नाम पर यह बनाया गया, लेकिन फिलहाल तो यह सैंटर खुद ही बीमार नजर आ रहा है, स्ट्रीट डॉक का इलाज क्या करेंगा।
सूबे की योगी सरकार खतरनाक स्ट्रीट डॉग पर कंट्रोल के नाम पर सालाना एक करोड़ का खर्चा कर रही है। एक स्ट्रीट डॉगको पकड़ने, रेबीज इंजेक्शन, नसबंदी और पोषक आहार के लिए 998 रुपये का बजट तय किया है। इस हिसाब से एबीसी सेंटर पर सालाना लगभग एक करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। हालांकि यह बात अलग है कि नगर निगम के पास केवल 150 स्ट्रीट डॉग को रखने की क्षमता है, जबकि निगम के आंकड़े बता रहे हैं कि स्ट्रीट डॉग की संख्या 1.5 लाख के पार है। ऐसे हालात में स्ट्रीट डॉग की मुसीबत से फिलहाल छुटकारे की उम्मीद ना ही रखी जाए तो अच्छा है।
यह कहना है नगरायुक्त सौरभ गंवार का
कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। नया सेंटर करीब डेढ़ माह पहले शुरू हुआ है। 25 मई को पुराने सेंटर का संचालन भी यही एजेंसी शुरू करेगी करेगी। दो सेंटरों पर 130 कुत्तों की प्रतिदिन बंध्याकरण सुनिश्चित करना है। फिलहाल यह एजेंसी औसतन 45 आवारा कुत्ते रोज पकड़ रही हैं।
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