विवाह मंडपों के सीवर साफ रहीं निगम की जेटिंग गाड़ियां
विवाह मंडपों के सीवर साफ रहीं निगम की जेटिंग गाड़ियां
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छावनी के वेस्ट एंड रोड स्थित विवह मंडप कैसल व्यू के सीवर की सफाई करने पहुंची जेटिंग मशीन का वीडियो हुआ वायरल
मेरठ। नगर निगम मेरठ की सीवर साफ करने वाली अत्याधुनिक जेटिंग मशीनों और गाड़ियों का इस्तेमाल पार्षदों द्वारा चिन्हित संकटग्रस्त सार्वजनिक क्षेत्रों के बजाय नगर निगम क्षेत्र को छोड़कर छावनी इलाके में निजी विवाह मंडपों में व्यावसायिक लाभ के लिए किए जाने का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। शादियों के सीजन में मोटी रकम और सांठगांठ के खेल में सरकारी अमले द्वारा किए जा रहे सार्वजनिक धन के इस खुले दुरुपयोग के इस मामले के बाद नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। एक तरफ जहां शहर की आम जनता नारकीय स्थितियों में जीने को मजबूर है और गलियों में सीवर का गंदा पानी उफन रहा है, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों व चालकों की मिलीभगत से निगम के संसाधनों को निजी व्यावसायिक हितों की ओर मोड़ा जा रहा है। महानगर के तमाम ऐसे इलाके हैं जहां सीवर चोक पड़े हैं, लेकिन इनकी सफाई कर लोगों को राहत देने के बजाए नगर निगम की जेटिंग गाड़ियां महानगर के नगर निगम इलाके को छोड़कर छावनी के वेस्ट एंड रोड स्थित विवाह मंडप कैसल व्यू के सीवर की सफाई कर रही हैं। इसको लेकर नगर निगम के पार्षद संजय सैनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल किया है, जिसमें नगर निगम की जेटिंग गाड़ी छावनी के वेस्ट एंड रोड स्थित कैसल व्यू में सीवर साफ करने पहुंची है। दरअसल निगम के वार्ड 50 के पार्षद को सूचना मिली की निगम की गाड़ी छावनी इलाके में कैसल व्यू विवाह मंडप में सीवर सफाई को पहुंची है। वह तुरंत मौके पर पहुंच गए। वहां जेटिंग गाड़ी मौजूद थी। स्टाफ सफाई कार्य करा रहा था। पार्षद ने वहीं से जेई और एई को कॉल किया और बताया कि आज सुबह उन्होंने अपने वार्ड के सीवर सफाई का आग्रह किया था, लेकिन वहां गाड़ी नहीं भेजी किसी अरुण नाम के कर्मचारी ने छावनी वेस्ट एंड रोड स्थित विवाह मंडप कैसल व्यू में ये गाड़ियां सफाई के लिए भेज दी हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत मंडलायुक्त के अलावा सीएम योगी से किए जाने की भी बात कही है। उल्लेखनीय है कि इन जेटिंग गाड़ियों का कार्य महानगर में निगम पार्षदों के बताए सीवरों की सफाई करना है लेकिन बजाए सीवरों की सफाई करने के जेटिंग गाड़ियों का स्टाफ निजी विवाह मंडपों में सीवरों की सफाई करने का काम कर रही हैं।
सरकारी धन व साधनों का दुरूपयोग
इस मामले के सामने आने के बाद तमाम निगम पार्षदों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह सरकारी धन और संसाधनों के दुरूपयोग का मामला है। जिन जेटिंग गाड़ियों से सरकारी सीवर साफ किए जाने चाहिए उनसे चंद सिक्कों के चालच में निजी संपत्तियों में कार्य लिया जा रहा है। उनका कहना है कि एक तरफ जहां शहर की आम जनता नारकीय स्थितियों में जीने को मजबूर है और गलियों में सीवर का गंदा पानी उफन रहा है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम के संसाधनों को निजी लाभ के लिए मोड़ा जा रहा है। इस प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ स्थानीय पार्षदों और जनता में भारी रोष व्याप्त है। यह पहला मौका नहीं है जब मेरठ नगर निगम के कामकाज पर सवाल उठे हैं। पार्षदों द्वारा लगातार यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि जहां विकास कार्यों और सीवर मरम्मत के बजट को रसूखदार बिल्डरों और पसंदीदा ठेकेदारों की तरफ मोड़ दिया जाता है। अब सरकारी सीवर सफाई गाड़ियों का निजी व्यावसायिक उपयोग इस भ्रष्टाचार की श्रृंखला में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। निगम पार्षदों ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी संसाधनों का यह दुरुपयोग तुरंत नहीं रोका गया और जनता के उफनते सीवरों की सफाई को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो वे नगर निगम के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
बदहाल हैं शहर के सीवर
उनके वार्डों में सीवर लाइनें महीनों से चोक पड़ी हैं, जिसकी लिखित शिकायतें अधिकारियों को लगातार दी जा रही हैं। नियमों के मुताबिक इन मशीनों को पार्षदों के बताए गए संकटग्रस्त सार्वजनिक क्षेत्रों में भेजा जाना चाहिए। इसके विपरीत, शादियों और समारोहों के सीजन को देखते हुए नगर निगम के अधिकारियों और ड्राइवरों की मिलीभगत से इन सरकारी गाड़ियों को मोटी रकम या सांठगांठ के एवज में प्राइवेट विवाह मंडपों के सीवर साफ करने में झोंका जा रहा है। यह न केवल टैक्सपेयर्स के पैसे का नुकसान है, बल्कि उन वार्डों के नागरिकों के साथ अन्याय है जो सीवर की बदबू से त्रस्त हैं।
शहर का हाल उफनते सीवर जनता बेहाल
एक तरफ निजी मंडपों की सीवर लाइनें चमकाई जा रही हैं, तो दूसरी तरफ मेरठ शहर की वास्तविक तस्वीरें निगम के दावों की पोल खोल रही हैं। शताब्दी नगर के सेक्टर-4सी पॉकेट में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि घरों के भीतर सीवर का गंदा पानी अक्सर घुस जाता है। यहां वाशिंदों ने बदबू और संक्रामक बीमारियों के डर से वहां से पलायन करने की चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है। पिछले दिनों वार्ड-6 (दिल्ली रोड मोहकमपुर) में तालाबंदी हो गयी थी मूलभूत सुविधाओं, जर्जर सड़कों और जलभराव की समस्या को लेकर त्रस्त होकर वार्ड-6 के लोगों ने पार्षद प्रशांत कसाना के नेतृत्व में नगर निगम कार्यालय पर ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर धावा बोला और मुख्य गेट बंद कर प्रदर्शन किया, लेकिन हालत में कोई खास सुधार नहीं हआ। इसके अलावा वार्ड-74 (पूर्वा अहमदनगर) और दूसरे वीआईपी वार्डों की दुर्दशा की बात करें तो पूर्वा अहमदनगर और कोठी अतनास की गलियों की सभी नालियां और सीवर कचरे से चोक हैं। यहां तक कि सिविल लाइंस जैसे वीआईपी वार्ड भी जलभराव और जाम नालों की समस्या से जूझ रहे हैं। नगर निगम की प्रशासनिक सुस्ती का स्तर यह है कि कुछ समय पहले शहर के एक इलाके में एक महिला को अपने इलाके के लंबे समय से उपेक्षित और कचरे से पटे पड़े नाले की सफाई कराने के लिए बच्चे के नाले में गिरने की झूठी खबर अफसरो तक पहुंचानी पड़ी। उसके बाद नगर निगम के अमले ने तीन घंटे की मशक्कत कर उस नाले को साफ किया।
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