भ्रष्टाचार, घपले वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री और शासन स्तर तक पहुंची
मेरठ। नगर निगम में पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार, घपले और वित्तीय अनियमितताओं के कई बड़े मामले सामने आए हैं, जिनकी शिकायतें सीधे मुख्यमंत्री और शासन स्तर तक पहुंची हैं। नगर निगम में लगातार उजागर हो रहे इन घोटालों के कारण शासन ने विभिन्न स्तरों पर उच्च स्तरीय जांच और कमेटियों का गठन कर कड़ा रुख अख्तियार किया है। नगर निगम के इन घपले घोटालों की जांच निगम पार्षदों की शिकायत पर चल रही है, हालांकि यह बात अलग है कि इन जांचों में निगम के संबंधित कथित आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी बाकि है। यह भी साफ नहीं कि जिन मामले की जांच का दावा शिकायत करने वाले निगम पार्षद कर रहे हैं उनमें कार्रवाई होगी भी या नहीं
इन मामलों में चल रही है पार्षदों की शिकायत पर जांच
इस साल माह जुलाई में नगर निगम के निर्माण और जलकल विभाग में करोउ़ों के फर्जी वाड़े का आरोप लगाते हुए वार्ड पचास के पार्षद संजय सैनी ने लखनऊ में सीएम के जनता दरबार में पहुंचकर शिकायत की थी। संजय सैनी का आरोप है कि रोप लगाया गया है कि नगर निगम के निर्माण स्टोर में तैनात एक लिपिक ने फर्जी फाइलें तैयार कर करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। इसके साथ ही जलकल विभाग में भी बिना किसी वास्तविक धरातलीय कार्य के फर्जी फाइलों के जरिए विशिष्ट फर्मों को करोड़ों रुपये का भुगतान करने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों के साथ जलकल के बजट की समीक्षा और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की है, जिस पर शासन स्तर से प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
कौन खा गया गायों का चारा
पिछले साल माह सितंबर में यह मामला सामने आया था। नगर निगम की गोशालाओं में पिछले वर्ष जुलाई 2025 में एक बड़ा चारा घोटाला सामने आया था, जिसकी गूंज मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी। रिकॉर्ड के अनुसार, नगर निगम हर महीने गोवंशों के चारे-चोकर और रखरखाव पर लगभग 35 लाख रुपये खर्च करने का दावा कर रहा था। लेकिन जिलाधिकारी (डीएम) और नगर आयुक्त द्वारा गठित जांच कमेटियों की औचक जांच में दो टीन-शेडों में बंद लगभग 640 गोवंश भूख से तड़पते और बेहद कमजोर हालत में मिले थे। इस मामले में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कड़े कदम उठाए गए थे।
स्वच्छता सर्वेक्षण में धांधली के दाग
जून 2026 में नगर निगम के स्वच्छता सर्वेक्षण की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए। पार्षदों द्वारा आरोप लगाया गया कि शहर में जमीनी स्तर पर वास्तविक कार्य करने के बजाय एजेंसियां और संबंधित अधिकारी होटलों में बैठकर फर्जी ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। स्वच्छता के नाम पर आवंटित सरकारी बजट का अनुचित उपयोग होने की शिकायतों को शासन स्तर पर संज्ञान में लिया गया है।
पार्किंग घोटाला
नगर निगम में इसी साल अक्टूबर 2026 की शुरुआत में मेरठ नगर निगम का एक और बड़ा पार्किंग घोटाला सामने आया है। दयानंद नर्सिंग होम के सामने नाले के ऊपर और आसपास के प्रमुख चौराहों तक अवैध पार्किंग संचालित करने तथा किराया व संपत्ति विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं, जिसकी फाइलें भी वर्तमान में जांच के दायरे में हैं।
सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे
इसके अतिरिक्त, मेरठ नगर निगम और विकास प्राधिकरण की सीमा के भीतर बड़े पैमाने पर हुए अवैध निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2026 में सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने साफ चेतावनी दी है कि शहर में एक-एक अवैध निर्माण को जमींदोज किया जाए और इसके लिए जिम्मेदार प्रशासनिक व नगर निगम अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
शासन का रवैया बेहद कठोर
इन सभी मामलों में लगातार मिल रही शिकायतों और जनसूचना अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों को दबाने के प्रयासों के बाद, शासन स्तर पर अब इन फाइलों को तेजी से खंगाला जा रहा है। पार्षदों और जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच कमेटियां गठित की गई हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी कर्मचारी या ठेकेदार को बख्शा नहीं जाएगा और जांच रिपोर्ट आने के बाद सीधे विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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