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मेरठ के कई इलाके डेंजर जोन में तब्दील

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सुप्रीमकोर्ट के कठोर आदेश के बाद भी महानगर में कायम है कुत्तों का आतंक

मेरठ। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद भी स्ट्रीट डेंजरस स्ट्रीट डॉग को लेकर नगर निगम के अफसर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। नगर निगम के वार्ड 39 से भाजपा के पार्षद राजीव गुप्ता पर स्ट्रीट डॉग के हमले के बाद डेंजरस स्ट्रीट डॉग का मामला फिर से गरमा गया है। एक ओर स्ट्रीट डॉग ने शहर की पुरानी और घनी आबादी वाले कई इलाकों को डेंजर जोन में तब्दील कर दिया है, वहीं दूसरी ओर स्ट्रीट डॉग की समस्या अब शहर में लाइलाज रोग बनती जा रही है। स्ट्रीट डॉग की बीमारी से शहर को निजात दिलाने के लिए यूं नगर निगम दो स्थानों पर एनएच-58 स्थित शंकरनगर में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाया था। यहां रोज करीब 100 कुत्तों की नसबंदी और एंटी रैबीज टीका लगाने की क्षमता बताई गई थी। बाद में हापुड़ रोड स्थित तिरंगा गेट के पास करीब 200 कुत्तों की क्षमता वाला नया एबीसी सेंटर बनाया गया और पुराने सेंटर को बंद कर दिया गया। निगम के पार्षदों का आरोप है कि नए सेंटर पर भी पर्याप्त संख्या में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण नहीं हो रहा है। शहर में आवारा कुत्तों की संख्या दो लाख से अधिक बताई जाती है। ऐसे में नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि ब्रह्मपुरी समेत शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। नगर निगम को इस पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।

हमला कर मार देते

सितंबर 2026 की शुरुआत में ही ब्रह्मपुरी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था का जायजा ले रहे वार्ड-39 के भाजपा पार्षद राजीव गुप्ता उर्फ काले पर एक आवारा कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया और उनके पैर पर तीन जगह गहरे घाव कर दिए। अगस्त 2026 में जानी खुर्द क्षेत्र के किठौली गांव में 58 वर्षीय किसान लक्ष्मी सैनी पर आवारा कुत्तों के एक झुंड ने उस समय जानलेवा हमला कर दिया जब वह अपने गन्ने के खेत में काम कर रहे थे। कुत्तों के नोचने के कारण मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। सुसोला खुर्द गांव में 55 वर्षीय महिला सूरजमुखी जब खेत से लौट रही थीं, तब कुत्तों के झुंड ने उन्हें बुरी तरह नोच डाला, जिससे अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। कंकरखेड़ा, अमोलिक कॉलोनी, संत विहार, दातल गांव और शारदा रोड जैसे शहरी व अर्ध-शहरी इलाकों में भी बच्चों और बुजुर्गों पर लगातार हमले दर्ज किए जा रहे हैं।

सुप्रीम आदेश

अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और कोर्ट परिसर जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम (आश्रय स्थल) में रखा जाएगा, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा। जो कुत्ते लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं, रेबीज से ग्रस्त हैं या अत्यधिक आक्रामक और खतरनाक हैं, उन्हें वैधानिक प्रोटोकॉल के तहत मारने पर विचार किया जा सकता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह से काम करने वाला एनिमल बर्थ Control (ABC) सेंटर हो । आदेश में सुप्रीमकोर्ट ने यह भी साफ किया है कि अदालत के आदेशों का पालन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। शैक्षणिक या सार्वजनिक परिसरों में यदि कोई पशु कल्याण समूह या संगठन कुत्तों को खाना खिलाता है, तो डॉग बाइट या नुकसान होने पर कानूनी जिम्मेदारी उसी संगठन की होगी।

दस साल में पांच लाख से ज्यादा घटनाएं

मेरठ में पिछले 10 वर्षों का कोई एक संकलित सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम वर्षवार और दैनिक आधार पर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) के आंकड़े दर्ज करते हैं। हालांकि, सरकारी अस्पतालों के रिकॉर्ड के अनुसार, मेरठ में हर साल औसतन 30,000 से 45,000 लोग कुत्ते के काटने का शिकार होते हैं। इस आधार पर अनुमान लगाया जाए तो पिछले 10 वर्षों में मेरठ जिले में 3.5 लाख से 4 लाख से अधिक कुत्ते काटने की घटनाएं हो चुकी हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में एक वर्ष के भीतर 42466 से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार होकर बैक्सीन लगवाने पहुंचे। इसमें निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या शामिल नहीं है। मुख्य पीएल शर्मा जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 150 से 300 मरीज कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। सोमवार को (रविवार की छुट्टी के कारण) यह संख्या बढ़कर तीन सौ से बढ़कर कई बार पांच सौ तक पहुंच जाती है। अक्कसर मरीजों भारी तादाद के कारण जिला अस्पताल में अक्सर एंटी-रेबीज वैक्सीन की कमी देखी जाती है, जिससे रोजाना कई मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि सीएमओ डा. राम प्रसाद का दावा है कि एंटी रेबीज वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। जिला अस्पताल और सीएचसी व पीएचसी में भी माकूल तादात में वैक्सीन रखवाई गई हैं।

मवाना सरधना पर कई बार कमी

मवाना और सरधना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में सामान्य एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की नियमित आपूर्ति तो रहती है, लेकिन समय-समय पर स्थानीय स्तर पर और एंटी-रेबीज सीरम (ARS) की भारी किल्लत सामने आती रहती है। मवाना और सरधना के सरकारी अस्पतालों में कुत्ते-बंदर के काटने पर लगाई जाने वाली सामान्य वैक्सीन (ARV) आमतौर पर मुफ्त उपलब्ध होती है। मरीजों की भारी भीड़ के बावजूद अस्पताल प्रशासन इसकी उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश करता है।

एंटी-रेबीज सीरम की भारी कमी

मवाना और सरधना के सरकारी अस्पतालों में कुत्ते-बंदर के काटने पर लगाई जाने वाली सामान्य वैक्सीन (ARV) आमतौर पर मुफ्त उपलब्ध होती है। मरीजों की भारी भीड़ के बावजूद अस्पताल प्रशासन इसकी उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश करता है। कई बार जब कुत्ता बहुत गहरा घाव कर देता है और खून निकलने लगता है, तब सामान्य वैक्सीन के साथ एंटी-रेबीज सीरम (इम्यूनोग्लोबुलिन) लगाना बेहद जरूरी होता है। यह सीरम मवाना और सरधना के स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध नहीं होता है। सीरम के लिए मवाना और सरधना के डॉक्टरों को मरीजों को मेरठ के पीएल शर्मा जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।

दिल्ली करना पड़ता है रैफर

हालांकि, जिला अस्पताल में भी अक्सर सीरम का स्टॉक खत्म होने के कारण मरीजों को दिल्ली तक रेफर करना पड़ जाता है। हालांकि अब जिला अस्पताल के अलावा मेरठ मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भी 24 घंटे मुफ्त एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाने की सुविधा शुरू की गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों के मरीजों को थोड़ी राहत मिली है।

बाजार में ऊंची कीमत

निजी मेडिकल स्टोर या प्राइवेट मार्केट में अच्छी क्वालिटी की एक एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की कीमत 300 से लेकर 450 प्रति डोज के बीच होती है। चूंकि रेबीज से पूरी सुरक्षा के लिए डॉक्टर आमतौर पर 4 से 5 डोज का पूरा कोर्स लगाने की सलाह देते हैं, इसलिए प्राइवेट में कुल खर्च लगभग ₹1,200 से ₹2,200 तक आ सकता है। यदि आप प्राइवेट स्टोर से वैक्सीन खुद खरीद रहे हैं, तो ध्यान रखें कि इसे 2°C से 8°C के तापमान (रेफ्रिजरेटर) में रखना अनिवार्य होता है। मेडिकल स्टोर से अस्पताल ले जाते समय इसे बर्फ के टुकड़े (Ice Pack) के साथ ही ले जाएं, अन्यथा तापमान बढ़ने पर वैक्सीन खराब हो सकती है। यदि घाव बहुत गहरा है और डॉक्टर ने इम्यूनोग्लोबुलिन (सीरम) लिखा है, तो इसकी कीमत वजन के अनुसार तय होती है। प्राइवेट मार्केट में सामान्य सीरम छह सौ से लेकर 15 सौ और एडवांस सीरम 25,000 से लेकर 5,000 प्रति वॉयल आता है।

नगरायुक्त का है कहना

इस संबंध में नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने बताया कि दो एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर है। कमेला स्थित सेंटर संचालित है। शंकर नगर वाला भी चालू करने जा रहे हैं। प्रतिदिन 130 आवारा कुत्तों का बंध्याकरण होगा। अभी 70 से 80 तक हो रहा है। परतापुर में आक्रामक कुत्तों के शेल्टर हाउस बनाने के लिए जमीन चिह्नित कर शासन को कार्य योजना भेजी गई है।
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