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ये खल है या फिर दुधारूओं के लिए जहर

ये खल है या फिर दुधारूओं के लिए जहर

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ये खल है या फिर दुधारूओं के लिए जहर
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मामला सीएम कार्यालय तक पहुंचा, इंचार्ज पर लटकी कार्रवाई तलवार, खल के नाम पर हजारों पशुओं को जहर

मेरठ। कैटल फीड प्लांट परतापुर में पशुओं को चारे में मिलाकर दी जाने वाली खल के नाम पर जहर दिया जा रहा है। इस कैटल फीड प्लांट में तैयार की गयी यह खल केवल मेरठ के ही दुधारू पशुओं को नहीं खिलायी गयी बल्कि आसपास के जनपदों में में भी हजारों दुधारू महंगे पशुओं को खल के नाम पर जहर दिया जा रहा है। यह पूरा मामला सीएम कार्यालय तक पहुंच गया है, जिसके चलते कैटल फीड प्लांट परतापुर की इंर्चाज पर सीएम कार्यालय की कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बेजुबान निरिह दुधारू पशुओं को खल के नाम पर जहर के इस सनसनी खेज कांड का खुलासा किसी अन्य ने नहीं बल्कि दूध संघ का हिस्सा उसके पूर्व डायरेक्टर कंकरखेड़ा श्रद्धापुरी निवासी प्रदीप शर्मा ने किया है। उन्होंने बताया कि खल के नाम पर जहर से हजारों दूधारू पशुओं की जान पर बन आयी है। इस जहरीली खल से कितने दुधारू पशु प्रभावित हुए हैं वह इसका भी ब्योरा जुटा रहे हैं। लेकिन बेजुवानों के प्रति की गयी शर्मसार करने वाले इस घटना ने दुध उत्पादन करने वाले किसानों को जरूर संकट में डाल दिया है।

सीएम योगी से कठोर कार्रवाई की मांग

प्रदीप शर्मा ने इस मामले में सीएम कार्यालय को भेजे गए पत्र में पूरे मामले की जांच के साथ ही कैटल फीड प्लांट की लखनऊ से उच्च स्तरीय कमेटी भेजकर जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने सीएम को भेजे पत्र में बताया है कि कैटल फीड प्लांट मेरठ में इकाई प्रभारी श्रीमती गीता द्वारा अत्यन्त खराब क्वालटी का पशु आहार बनवाकर बाजार में भिजवाया जा रहा है। यह पशु आहार बैगों में ही सड़ रहा है। इसके बैगों पर मेनिफेक्चरिंग की तिथि माह जुलाई 2026 है। सीएम को बताया गया है कि सबसे शर्मसार करने वाली बात तो यह है कि इकाई की प्रभारी गीता स्वयं ही क्लवालिटी कंट्रोल अधिकारी भी हैं। उन्होंने अपने दोनों ही दायित्वो ंका निर्वहन नहीं किया है। पत्र में कहा गया है कि घटिया खल के इन बैगों में रखी गयी खल में फंगस लग चुकी है। सैकडों टन जहरीला पशु आहार किसानों को थोप दिया गया है। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की गयी है।

दूध संघों का भी खल के नाम पर जहर

मामले का खुलासा करने वाले दूध संघ के प्रदीप शर्मा ने बताया कि कैटल फीड प्लांट से यही पशु आहार अनुदान में बाटने के लिए दुग्ध संघ मेरठ को भी भेजा गया था। जिसको दुग्ध संघ मेरठ द्वारा कैटल फीड प्लांट को वापिस कर दिया गया है। उपरोक्त पशु आहार को बनाने में घटिया सामग्री व शीरे के स्थान पर पानी की मात्रा मिलाकर बनाया गया है जो खराब हो चुका है। यह पशु आहार यदि पशुओं ने खा लिया तो पशु किसी भी गम्भीर बीमारी के शिकार हो सकते हैं।
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