झमाझम बारिश खड़ी कर रही कांवड़ यात्रा में मुश्किलें
झमाझम बारिश खड़ी कर रही कांवड़ यात्रा में मुश्किलें
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झमाझम बारिश खड़ी कर रही कांवड़ यात्रा में मुश्किलें, कांवड़ यात्रा मार्ग की सड़क को बारिश ने दिया उधेड़
मेरठ। बारिश ने शहर और कांवड़िया दोनों की रफ्तार को थाम दिया है। झमाझम बारिश में कांवड़ियों को भारी मुसीबतें उठानी पड़ रही हैं। तमाम कांवड़िया ऐसे भी हैं जो खुले आसमान के नीचे बारिश में रहने को मजबूर हैं। हाइवे की यदि बात करें तो यहां पर कांवड़ सेवा के लिए जो कैंप लगाए गए हैं उनमें क्षमता से अधिक कांवड़िया मौजूद हैं। दरअसल बारिश से बचने के लिए कांवड़ियों ने अपनी कांवड़ एक साइड की जो राेड बंद हैं, वहां विश्राम देकर अपने ठिकाना बनाया हुआ है। कांवड़ियों को बारिश ने चिंता में डाल दिया है। उनका कहना है कि भारी कांवड़ उठाकर चलना बेहद मुश्किल भरा है। पहले ही कांवड़ में काफी वजन होता है और भीग जाने के बाद तो कांवड़ और भी ज्यादा भारी हो जाती है। बारिश से कांवड़ यात्रा बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। जो दूर दराज के कांवड़ियां है मसलन जिन्हें हरियाणा के दूरस्थ या राजस्थान के इलाकों में जाना है, उनका कहना है कि यदि ऐसा ही मौसम बना रहा तो इस बार कांवड़ यात्रा बेहद दुरूह हो जाएगी। वो प्रार्थना कर रहे है कि मौसम उनका साथ दे ताकि अपनी यात्रा पर आगे बढ़ सकें। दूरदराज के ही नहीं जो कांवड़िया दिल्ली और गजरौला, बुलंदशहर या हापुड़ व नोएडा आदि के लिए जल लेकर चले हैं वो भी बारिश की वजह से बेहद परेशान हैं। उनको समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। कांवड़ की यात्रा काे बीच में किसी भी दशा में अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता और झमाझम बारिश आगे बढ़ने नहीं दे रही है। बारिश ने कांवड़ यात्रा में तमाम मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। शुक्रवार को हाइवे पर लगे तमाम कैंपों में ठहरे दूरदराज के कांवड़ियों ने बताया कि बारिश की वजह से उनकी यात्रा का शेड्यूल गड़बड़ा गया है। बारिश में कंधों पर कांवड़ लेकर चलना बेहद मुश्किल भरा है। गीले रास्तों व सड़कों पर चलने में तमाम दुश्वारियां आ रही हैं।
सड़कें बुरी तरह डेमेज
कांवड़ यात्रा मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बारिश की वजह से सड़कों का डेमेज हो जाना है। गंगनहर पटरी मार्ग, एनएच-58, रुड़की रोड, दिल्ली रोड और सबसे खराब तो गढ़ रोड व वाया हापुड़ स्टैंड होते होते हापुड़ रोड ये रास्ते बारिश की वजह से डेमेंज हो गए हैं। दरअसल हो यह है कि बारिश में सड़क के छोटे गड्ढे धीरे-धीरे रोड़ियां छोड़ने लगते हैं। ये रोड़ियां सड़कों पर फैल रही हैं। रास्ते में जब रोड़ियां आ जाएं तो जो नंगे पांव अपनी कांवड़ उठाकर यात्रा पर निकले हैं उन्हें किस कदर मुश्किलों और मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा होगा इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। बारिश की वजह से सड़कों पर गड्ढे हो गए हैं उनकी रोड़ियां सड़कों पर फैल गयी हैं। इसके अलावा हाइवे की यदि बात करें तो रोड साइड पर जहां कच्चा रास्ता होता है, उसकी मिट्टी झमाझम बारिश की वजह से सड़क वाले रास्ते तक आ गयी हैं। कई जगह इसकी वजह से कीचड़ हो गयी है। हाइवे पर खड़ौली ईदगाह के समीप रोड साइड की मिट्टी सड़क तक आ गयी है। अच्छी बात यह है कि इस इलाके के लोग हाथों हाथ बड़े पाइपों से रोड की मिट्टी हटा दे रहे हैं। एनएच-58 हाइवे के तमाम फ्लाई ओवर पर भी सीमेंट की रोड जगह-जगह से डेमेज हो गयी हैं।
महादेव ले रहे परीक्षा
हरिद्धार और उत्तराखंड़ के गोमुख और दूसरे स्थानों से गंगा जल लेकर कांवड़ उठाने वाले तमाम कांवड़ियों ने बताया कि इस बार महादेव परीक्षा लेने के मूड में हैं। वो बताते हैं कि जब से कांवड़ उठायी है मौसम का मिजाज ही पलटा हुआ है। उत्तराखंड से शुरू हुई बारिश रास्ते में जहां जहां से होकर गुजर रहे हैं, वहां-वहां मिल रही है। ऐसा लगता है कि गंतव्य तक पहुंचने के बाद भी बारिश का इस बार थमने का मूड नहीं। जो लोग हर साल कांवड उठाते हैं, वो बताते हैं कि कांवड़ यात्रा में अक्सर बारिश होती हैं। लेकिन ऐसी बारिश नहीं होती जैसी इस बार हो रही हैं। लग रहा है कि इस बार कांवड़ियों की परीक्षा ली जा रही है, लेकिन तमाम कष्ट सहकर भी कांवड़ियों की श्रद्धा अटूट बनी है।
प्रशासन का सलाह
तमाम कांवड़िये ऐसे मिले जिन्होंने बताया कि उत्तारखंड़ से लेकर गंतव्य तक पहुंचने तक सबसे ज्यादा असुविधा का सामना दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होने में करना पड़ता है। उत्तराखंड के हरिद्वार और दूसरे इलाकों से कांवड़ा उठाने वाले सबसे ज्यादा हरिद्धार से वाया मेरठ होकर गुजरते हैं। ऐसा नहीं कि रास्ते में सुविधाएं नहीं मिलती हैं। यूपी की सीमा में प्रवेश के बाद खासतौर से जनपद मुजफ्फरनगर में प्रवेश के बाद खाने आदि के सामन की असुविधा नहीं होती और दिल्ली की सीमा तक यह सेवाएं बनी रहती हैं। लेकिन मुश्किल टॉयलेट की कमी लेकर होती है। जो लोग कांवड़ सेवा शिविर लगाते हैं, वो टॉयलेट का जो इंतजाम करते हैं वो नाकाफी होता है। कई लाख लोग कांवड़ कंधे पर लेकर चलते हैं, उनकी संख्या के अनुसार जितने टॉयलेट खासतौर से पिंक टॉयलेट होने चाहिए उतने नहीं मिलते। कांवड़ियों का कहना है कि प्रशासन को सलाह है कि रोड साइड पर मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था यदि कर दी जाए तो बेहतर रहेगा।
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