तीन मुस्लिम सांसदों—यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलील उर रहमान के टीएमसी में वापसी की लगायी जा रही हैं अटकलें, स्यानी घोष को लेकर बड़ा धमका संभव
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बागी सांसदों—यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलील उर रहमान—द्वारा एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक से लगातार दूसरी बार दूरी बनाने से भाजपा को राजनीतिक झटका लगा है। इन सांसदों ने स्पष्ट किया है कि वे भाजपा या एनडीए में शामिल नहीं होंगे, जिससे बागी गुट में आंतरिक मतभेद और राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बागी सांसदों—यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलील उर रहमान—द्वारा एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक से लगातार दूसरी बार दूरी बनाने से भाजपा को राजनीतिक झटका लगा है। इन सांसदों ने स्पष्ट किया है कि वे भाजपा या एनडीए में शामिल नहीं होंगे, जिससे बागी गुट में आंतरिक मतभेद और राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। ये सांसद मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और बहरामपुर जैसी मुस्लिम-बहुल सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
नफा नुकसान का है सवाल
टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) से अलग हुए 20 बागी सांसदों (एनसीपीआई समूह) में से तीन मुस्लिम सांसदों—यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलील उर रहमान—ने अपने मुस्लिम बहुल संसदीय क्षेत्रों में राजनीतिक नफा-नुकसान और जनता के तीखे सवालों के डर से एनडीए की बैठकों से दूरी बनाई है। इसके पीछे मुसलमान मतदाताओं की नाराजगी और भाजपा से नाराज बतायी जा रही पब्लिक का प्रेशर बताया जा रहा है। इन सांसदों के एनडीए से किनारा करने के बाद से तृणमूल कांग्रेस के खेमे में उनकी घर वापसी की अटकलें और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की मोदी सरकार को बड़ा झटका माना जा रहा है। ये बड़ा डेमेज बताया जा रहा है।
पब्लिक की नाराजगी का जोखिम नहीं
टीएमसी के इन तीनाें बागी सांसदों को डर है कि यदि एनडीए का पार्ट बने तो मुस्लिम बाहुल उसके संसदीय क्षेत्र में चुनावी नुकसान तय है। माना जा रहा है कि नफा नुकसान देखने के बाद ही तीन मुस्लिम सांसदों—यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलील उर रहमान—ने एनडीए से दूर रहने का फैसला किया है। हालांकि ये पश्चिम बंगाल के सीएम की ओर से राज्य के विकास के नाम पर बुलायी गयी बैठक का हिस्सा बने, लेकिन उस बैठक में इन्होंने 27 लाख मुस्लिम मतदाताओं के वोट काटे जाने का मसला प्रमुखता से उठाया। सीएम शुभेंदू अधिकारी पर उसको लेकर ट्रिब्यूलन को कहा। बताया गया है कि सीएम ट्रिब्यूनल पर राजी भी हो गए हैं।
नहीं होंगे भाजपा में शामिल
सांसद अबू ताहिर खान ने स्पष्ट किया है कि वे भाजपा या एनडीए के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में शामिल हो रहे हैं। हालांकि वे अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर समन्वय बैठकों में शामिल होते हैं, लेकिन वे अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ किसी भी कदम का समर्थन नहीं करना चाहते। इन सांसदों के एनडीए से किनारा करने के बाद से तृणमूल कांग्रेस के खेमे में उनकी घर वापसी की अटकलें और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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