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सिविल लाइन कुटिया चौराहे पर अराजकता सरीखे हालात

सिविल लाइन कुटिया चौराहे पर अराजकता सरीखे हालात

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सिविल लाइन कुटिया चौराहे पर अराजकता सरीखे हालात
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मेरठ। जिले का वीआईपी इलाका और इलाके में कुटिया नाम का चौराहा जहां अरसे से अराजकता पसरी है, लेकिन किसी की क्या मजाल जो चूं भी कर दे। जिस इलाके की बात की जा रही है वहां एससपी का सरकारी बंगला है। इसके अलावा चंद कदम की दूरी आर कमिश्नरी है जहां मंडल स्तर के अधिकारियों का पूरा अमला बैठता है। कमिश्नरी के सामने रोड पार कर जिला जज की अदालत है। इसके अलावा एसएसपी के बंगल के बगल में दूसरे पुलिस अफसरों के बंगले हैं। लेकिन किसी की क्या मजाल जो कुटिया की ओर जाकर भी झांक ले। कुटिया चाैराहे से जो रास्ता मवाना बस स्टैंड की ओर जा रहा है वहां पर भी कई आईपीएस अफसरों के बंगले हैं। दिन भर उनकी गाड़ियां कुटिया चौराहे से होकर आती जाती रहती हैं। लेकिन यह बात अलग है कि कोई नजर भर कर या कभी झांकर कुटिया चौराहे पर क्या हो रहा है यह देख ने की हिम्मत भी जुटा ले।

अराजकता सरीखे हालात

जिस कुटिया चोराहे का यहां जिक्र किया जा रहा है वहां नगर निगम ने कुछ दुकानें बनकार किराए पर दी हुई हैं। इनका मासिक किराया नगर निगम को मिलता है, हालांकि यह बात अलग है कि जो किराया नगर निगम को मिलता है उसकी बाजारू कीमत की यदि बात करें मसलन आज के सर्किल रेट के हिसाब से यदि बात करें तो वह किराया ऊंट के मुंह में जीरे के मानिंद है। बेहद कम किराया आज की रेट की तुलना में नगर निगम को मिल रहा है। क्योंकि दुकानों पुरानी किराए पर उठायी हुई हैं। अब यह भी बता देंते हैं कि यहां अराजकता का आलम कैसे है। कुटिया चौराहे पर आमने सामने दो चाय की दुकान है। इसके बाहरी हिस्से यानि मेन चौराहे पर भी इसी प्रकार की चाय पकौड़ी की दुकानें हैं। इन दिनों पर दिन भर बाइक व कार वालों का जमघट लगा रहता है। कई बार तो यहां इतनी ज्यादा लोगों की भीड़ होती है कि उनकी गाड़ियों से कुटिया चौराहे से माल रोड की ओर जाने वाला रास्ता लगभग बंद हो जाता है। यहां लोगों की आमद सुबह से शुरू हो जाती है और देर शाम तक रहती है। सुबह जो लोग मार्निंग वॉक को निकलते हैं उनका ठिकाना आते जाते समय यह कुटिया होता है। यहां की चाय की दुकानों पर अक्सर मार्निंगवॉक पर आने वाले चाय की चुस्कियां लेते हैं। यह सिलसिला पूरे दिन और देर शाम तक चलता है। लोगों की शिकायत यह भी कि यहां के जो रेट रखे गए हैं वह पूरे शहर में खाने के सामान के रेट से बहुत ज्यादा हैं। इसके पीछे दो ही वजह हो सकती हैं पहली तो यह कि कुटियां पर क्या चल रहा है इसकी सुध लेने की फुर्सत किसी अफसर को नहीं। दूसरा यह भी माना जा सकता है कि सिविल शहर का वीआईपी इलाका है इसलिए वीआईपी इलाका होने की वजह से यहां कोई कार्रवाई की जरूरत नहीं समझता।

शाम होते ही गाड़ियों में छलकते हैं जाम

कुटियां पर जो चाय की दुकानें हैं शाम ढलने यानि देर शाम को ये आमतौर पर बंद हो जाती हैं। उसक बाद अक्सर यहां इन दुकानों के बाहर लग्जरी गाड़ियां नजर आती हैं। जिनमें पीने पिलाने के शौकिन देखे जा सकते हैं। यहां दो बार फायरिंग सरीखी घटना हो चुकी हैं। इन गाड़ियों में बैठकर पीने पिलाने का शौक रखने वाले एक मेडिकल रेप पर जानलेवा हमला भी कर चुके हैं। बगल में एसएसपी का बंगला और फिर भी फायरिंग हो जाना सबाल तो पूछा ही जाना चाहिए फिर दिन में जो अराजकता का माहौल यहां नजर आता है क्या पुलिस की ओर से उसकी छूट दी गयी है। इस संबंध में नगरायुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि मामला कानून व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। पुलिस प्रशासन इस मामले में बेहतर बता सकते हैं। निगम की दुकानें भर हैं इससे ज्यादा कुछ नहीं।

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