मेरठ। ठेकेदार की भारी भरकम पेमेट की एवज में एक लाख की रिश्वत मांगने वाले राजकीय निर्माण निगम के जेई योगेन्द्र कुमार और उनके ड्राइवर नीरज को आज एंटी करप्शन टीम ने अरेस्ट कर लिया। कोर्ट में पेश करने के दोनों को जेल भेज दिया गया। सत्येंद्र सिंह तोमर राजकीय निर्माण निगम में ठेकेदारी करते हैं। बताया गया है कि महकमे पर लंबे समय से उनका पेमेंट विभाग में अटका हुआ है। उन्होंने विभाग में काफी प्रयास किया लेकिन भुगतान नहीं हो पाया। जबकि उनकी फाइल सभी जगह से ओके बतायी जा रही है। बकौल सत्येन्द्र सिंह तोमर उन्होंने जब तहकीकात की तो पता चला कि राजकीय निर्माण निगम के एक जूनियर इंजीनियर ने ही उनके पेमेंट की फाइल को रुकवाया हुआ है। सत्येन्द्र का कहना है कि जब उन्होंने जूनियर इंजीनियर से संपर्क किया तो पहले से उसने टकराया। उनका आरोप है कि बाद में उसने उनके पेमेंट की फाइल को ओके कराने के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत मांग ली।
यह भी आरोप है कि जेई तमाम माध्यमों से पिछले काफी समय से सत्येंद्र पर रिश्वत देने का दबाव बनवा रहा था। सत्येंद्र ने परेशान होकर एंटी करप्शन में शिकायत कर दी। लिखित शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ने ट्रैप की प्रक्रिया शुरू कर दी। एंटी करप्शन टीम ने सत्येंद्र को केमिकल लगे एक लाख रूपए देकर विभाग में भेज दिया। आरोप है कि मंगलवार सुबह सत्येंद्र ने जूनियर इंजीनियर से संपर्क किया और 1 लाख रूपए केमिकल लगे लेकर पहुंच गया। जूनियर ने अपने ड्राइवर नीरज को रकम लेने के लिए भेजा। जैसे ही नीरज ने रकम पकड़ी एंटी करप्शन टीम ने दबोच लिया। नीरज की मदद से एंटी करप्शन टीम विभाग में मौजूद योगेंद्र को दबोचने पहुंची तो वह भाग निकला। हालांकि कुछ दूरी पर ही उसे पकड़ लिया गया।
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