मेरठ। कैंट बोर्ड के बहुचर्चित करोड़ों रुपए के डोर टू डोर कूडा कलेक्शन घोटाले में जितनी भी जांचें हुई उन सभी में कैंट बोर्ड सेनेट्री सेक्शन के तीन अफसरों सेक्शन हेड (सफाई अधीक्षक) वीके त्यागी, सेनेट्री इंस्पेक्टर योगेश यादव व अभिषेक गंगवार को कसूरवार ठहराया गया। डोर टू डोर घोटाले में और जो कुछ हुआ वह कई बार सामने आ चुका है। लेकिन अब जो सबसे बड़ा खेल सामने आया है वो यह कि जांच के बाद मामले में जिन तीन को कसूरवार ठहराया गया था उनमें से केवल दो को ही सजा मुकर्रर की गई। सबसे बड़ा सवाल यह कि सेनेट्री इंस्पेक्टर योगेश यादव को जब ऑन पेपर कैंट अफसरों ने कसूरवार माना तो उनके खिलाफ किस वजह से कार्रवाई नहीं की गयी या राहत तजवीज कर दी गयी।
अभिषेक गंगवार दर्ज करा चुके हैं आपत्ति
डोर टू डोर घोटाले की चार्जशीट के बाद जानकारों की मानें तो सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दंडित कर्मचारी सफाई निरीक्षक अभिषेक ने अपने लिखित बयान में कहा:’अगर योगेश यादव वरिष्ठ भूमिका में दोषी नहीं हैं, तो मुझे दोषी क्यों ठहराया गया है? ‘इस मामले में दोनों कर्मचारियों ने अपने लिखित जवाबों में योगेश यादव की भूमिका का उल्लेख किया था।
योगेश यादव बोले मैं बेकसूर वार तो अभिषेक और वीके त्यागी कसूरवार कैसे
इस संवाददाता ने जब डोर टू डोर घोटाले से जुड़े इस पूरे प्रकरण में योगेश यादव ने कहा’अगर समान भूमिका में मैं निर्दोष हूं तो वे भी निर्दोष होने चाहिए, और अगर वे दोषी हैं तो मैं भी दोषी हूँ। मेरी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। ‘इसके बावजूद, भी मुख्य अधिशासी अधिकारी जाकिर हुसैन द्वारा योगेश यादव को न तो कोई स्पष्टीकरण/नोटिस दिया गया और न ही जांच/दंडात्मक कार्यवाही में शामिल किया गया।अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है:यदि भूमिका समान थी, तो जवाबदेही समान क्यों नहीं हुई मामला वर्तमान में केंद्रीय सतर्कता आयोग एवं उच्च प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं अभिलेखीय जांच की मांग की है।’दो कर्मचारियों पर कार्रवाई, तीसरे पर नहीं—जबकि समान भूमिका के दावे रिकॉर्ड में मौजूद हैं। ‘
Leave a comment