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जगह-जगह गड्ढे आदम कद झाड़ियां बदहाल है मेला नौचंदी स्थल

जगह-जगह गड्ढे आदम कद झाड़ियां बदहाल है मेला नौचंदी स्थल

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जगह-जगह गड्ढे आदम कद झाड़ियां बदहाल है मेला नौचंदी स्थल
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मेरठ। चार सौ साल पुराने  उत्तर भारत के मेला नौचंदी को जब से प्रांतीय मेले में कन्वर्ट किया गया है तब से इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। मेला का स्वरूप ही नहीं खत्म किया जा रहा है बल्कि जो रिवायतें मेले से जुड़ी हैं वो भी दफन कर दी गयी हैं। परंपरा रही है कि होली के एक सप्ताह बाद से मेला लगाना शुरू हो जाता था और वाकई ऐसा हुआ करता था। मेला नौचंदी में उत्तर भारत के तमाम राज्यों से दुकानदार आया करते थे। पूरे साल इस मेले का इंतजार देश भर के मेले करने वाले दुकानदार किया करते थे, लेकिन अब हालात यह है कि दूसरे राज्यों के दुकानदारों ने मेला नौचंदी से किनारा कर लिया है और इसके लिए पूरी तरह से इस मेले से जुड़े अफसरान या दूसरे लोग जिम्मेदार हैं, जिनका कभी भी ध्यान इस ओर नहीं जाता कि मेला अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार शुरू कर दिया जाए। परंपरा के नाम पर केवल और केवल प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों से कबूतर और गुब्बारे उड़ाकर मेला नौचंदी के उद्घाटन का ऐलान किया जाता है, इससे ज्यादा नहीं। मेला समय पर सुचारू रूप से और वहां आने वाले दुकानदारों की सुविधा का ध्यान रखते हुए मैनेज किया जाए तो शायद इस मेला का लूटा गया पुराना गौरव लौट आए।

टॉयलेट पर दरवाजे तक नहीं

मेला नौचंदी में जो व्यापारी दुकानें लेकर आते हैं, वो जिस टॉयलेट को दैनिक क्रिया के लिए यूज करते हैं उस टॉयलेट पर दरवाजे तक नहीं हैं। अफसरों के स्तर से इससे बड़ी बदइंतामी दूसरी नहीं हो सकती। मेला की प्रभारी अधिकारी सीडीओ नूपुर गोयल जब मेला नौचंदी स्थल का निरीक्षण करने को पहुंची तो वहां की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी का इजहार किया। सख्त लहजे में उन्होंने इंतजाम ठीक किए जाने की हिदायत दी।

ठेकेदार को लगायी फटकार

मेला नौंचदी में जितना भी कार्य होता है वो सारा कार्य मुजफ्फरनगर के किसी शुभम गोयल नाम के शख्स को दिया गया है। झूले का ठेका भी उसी को और तहबाजारी भी वहीं वसूलेगा। दुकानदार बताते हैं कि सारे फसाद और मुसीबत की वजह यही है कि एक ही ठेकेदार को सारा काम सौंप दिया जाना। यदि सारा काम बजाए शुभम को देने के प्रशासन ने झूले का ठेका किसी अन्य और तहबाजारी का किसी अन्य तथा बिजली यानि लाइटनिंग का ठेका किसी अन्य को दिया हाेता तो मेले की ऐसी बुरी दशा नहीं होती। इतना ही नहीं मेला व्यवस्थित भी हो पाता। आसपास के लोग बताते हैं कि ठेकेदार बजाए मेला को सुचारू रूप से चलाने के लिए सहयोग के प्रशासन के लिए ही सिरदर्द साबित होता है। बीच रास्तों तक में झूले लगवा देता है। जो झूले की जगह है वह भी उसने तय से ज्यादा घेर ली हैं। यह सब देखकर ही सीडीओ ने नाराजगी का इजहार किया।

सदस्य बोले करेंगे सहयोग

मेले की नोडल अफसर सीडीओ के मेला स्थल पर पहुंचने की सूचना पर मेला समिति के सदस्य अंकुर गोयल खंदक, नरेन्द्र राष्ट्रवादी, राहुल व मेला दुकानदार समिति के अध्यक्ष ललित आदि भी वहां पहुंच गए। अंकुर गोयल ने बताया कि मेले को सुचारू रूप से चलाने के लिए वह अपने सदस्यों को साथ लेकर मेले की नोडल अफसर को पूरा सहयोग देंगे। मेला का स्वरूप नहीं रखराब करने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सीडीओ ने मेला स्थल को दुरूस्त किए जाने के सख्त निर्देश दिए हैं।
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