नई दिल्ली। बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में कुछ ही घंटे की देरी बाकि है। चार मई की सुबह 9 बजे तक साफ हो जाएगा कि बंगल की धरती से मतदाताओं ने किसके पक्ष में संदेश भेजा है। वहीं दूसरी ओर एग्जिट पोल करने वाली ऐजेंसियों की बात की जाए तो इस बार पश्चिम बंगाल में बदलाव की बयार चली है। 2026 के एग्जिट पोल (Exit Poll) के अनुमानों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) को स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना है और पहली बार सरकार बन सकती है। ज़्यादातर सर्वे में बीजेपी को 142 से 175 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 99-140 सीटों के बीच सीमित दिखाया गया है, जो सत्ता में बदलाव का संकेत देता है। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दावा कर चुके हैं कि सत्ता के काफी करीब, कई सर्वे में बहुमत के पार हो चुका है। एग्जिट पोल के अनुसार ममता बनर्जी के लिए सत्ता बचाना चुनौतीपूर्ण लग रहा है पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो कुछ चीजे सामने आयी हैं खासतौर से सोशल मीडिया की मार्फत और अन्य राज्यों की तर्ज पर चुनाव के एन पहले खातों में रकम का डाला जाना, इन तमाम घटनाक्रमों ने चुनाव आयोग की साख का बट्टा लगाने का काम किया है। जो कुछ चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में हुआ है उसको लेकर देश के तमाम पूर्व मुख्च चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार को घेरा है और यहां तक कुछ ने तो उन पर भाजपा के ऐजेंट के तौर पर काम करने के आरोप लगा दिए हैं। चुनाव से पहले विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। ल्पसंख्यक समुदायों का आरोप है कि जानबूझकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के कारण, मुसलमानों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिए जाने की रिपोर्ट और तमाम विववाद सामने आए हैं। साइबर इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, हटाए गए मतदाताओं में 34% मुसलमान (जो कुल जनसंख्या का 27% हैं) और 63% हिंदू हैं, जो संकेत देता है कि यह व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा थी। चुनावउ के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा भी मुसलमानों को वोट ना देने देने के आरोप लगाए गए हैं। उनके साथ मारपीट तक की गयी। मतदान से पहले उनके इलाकों में दहशतगर्दी तक के आरोप टीएमसी और विपक्ष लगा चुका है।
Leave a comment