नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान आया और भारत का शेयर बाजार ढह गया। हालांकि बयान एक दिन पहले आया था लेकिन ट्रंप के बयान का व्यापक साइड इफैक्ट आज गुरूवार को बाजार पर नजर आया। आज यानी 30 अप्रैल 2026 को गिरकर बंद हुए। बंद होने पर, सेंसेक्स 582.86 अंक या 0.75 प्रतिशत गिरकर 76,913.50 पर और निफ्टी 180.1 अंक या 0.74 प्रतिशत गिरकर 23,997.55 पर रहा।
कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच आज गुरुवार को शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। निफ्टी 24,177.65 के मुकाबले 181 अंक फिसलकर 23,996.95 पर खुला। वहीं सेंसेक्स 77,496.36 की तुलना में 482 अंक टूटकर 77,014.21 पर खुला। बता दें कि क्रूड ऑयल के दाम जून डिलिवरी के लिए 120 डॉलर के लेवल को पार कर गए हैं, जो इसका 2022 के बाद सबसे ऊंचा लेवल है। एक दिन पहले भी यानि बुधवार को शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है। सेंसेक्स लगभग 12 सौ अंक लुढ़क कर 76, 300 के स्तर पर लुढक गया। निफ्टी 50 भी 350 अंक से अधिक गिरकर 23,800 के नीचे आ गया। इस बिकवाली से निवेशकों को कुछ ही देर में लगभग ₹9 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। इस गिरावट की वजह से निवेशकों का लाखों करोड़ का नुकसान हुआ है।
भारतीय शेयर बाजार में इस बड़ी गिरावट की वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की बड़ी बिकवाली रहा। लगातार बिकवाली का दबाव ने शेयर बाजार को बुरी तरह से पस्त दिया और बड़ी गिरावट दर्ज की गयी। विशेषज्ञों का कहना है इस गिरावट की वजह देश का राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल है। आने वाली राजनीतिक तस्वीर शेयर बाजार की दिशा तय करने का काम करेगी। इसके अलावा तिमाही नतीजे भी चिंता पैदा करने वाले बताए जा रहे हैं। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह ईरान जंग भी है। हालांकि सीजफायर चल रहा है लेकिन स्ट्रेट हाूर्मज पर ईरानी नाॅकाबंदी जारी होने के चलते तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह से बाधित है। भारतीय बाजार पर इसका सबसे बुरा असर पड़ रहा है। करीब एक माह पूर्व भारतीय शेयर बाजार बुरी तरह टूटा था।
तमाम शेयर डेंजर जोन में पहुंच गए हैं रही सही कसर भारी बिकवाली ने पूरी कर दी है। केवल भारतीय ही नहीं दुनिया के तमाम देशों के बाजार में हा-हाकार मचा हुआ है। दुनिया की ब्रांडेड कंपनियो के लिए अपने निवेशको को बचाए रखना और संभालने रखना एक बड़ी चुनौती बन गयी है। शेयर बाजार में इस गिरावट के बाद तमाम निवेशकों का प्रयास अपनी रकम को बाजार से निकलना है, हालांकि इसके चलते भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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