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महिला बिल पर विपक्ष सरकार के साथ, तरीका मंजूर नहीं

महिला बिल पर विपक्ष सरकार के साथ, तरीका मंजूर नहीं

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महिला बिल पर विपक्ष सरकार के साथ, तरीका मंजूर नहीं
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नई दिल्ली/ अरसे से लटके महिला बिल को लागू करने के सवाल पर विपक्ष सरकार के साथ है, लेकिन इस बिल के साथ जो अन्य प्रावधान केंद्र की मोदी सरकार जोड़ रही है विपक्षी दल खासतौर से कांग्रेस उससे इत्तेफाक नहीं रखती। कांग्रेस  चाहती है कि महिला कांग्रेस बिल का जो पुराना स्वरूप है उसी को यथावत लागू किया जाए, लेकिन मोदी सरकार महिला बिल को लागू करने के साथ ही उसमें आमूल-चूक प्रदर्शन कर रही है, जो विपक्षी दलों को मंजूर नहीं है। केंद्र सरकार ने आज गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में देश में अहम बदलाव लाने वाले विधेयक पेश किए। इनमें महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से प्रभावी रूप से लागू करने और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित हैं। चर्चा के लिए 16 और 17 अप्रैल को 15 घंटे का समय तय किया गया है। कल शाम 4 बजे वोटिंग की जाएगी। संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है।
बिल की टाइम लाइन पर सवाल
विपक्षी दल इस विधयेक की टाइम लाइन यानि इसको पेश किए जाने की टाइमिंग को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल कर रही है। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कई राज्यों के विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। ऐसे में कांग्र्रेस पार्टी जिन राज्यों में चुनाव चल रहे हैं उन पर ध्यान दे या फिर बिल पर बहस के लिए संसद आए। महिला आरक्षण बिल की क्रेडिट वॉर पर बोलते हुए अधीर रंजन ने याद दिलाया कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का मुद्दा कांग्रेस पार्टी बहुत पहले लेकर आई थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय बीजेपी ने ही इस बिल का कड़ा विरोध किया था। लोकसभा में इस समय महिला आरक्षण विधेयक को पेश करने पर वोटों की गिनती चल रही है। विधेयक पर बहस के लिए उसे पेश करने हेतु साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है।
पीएम मोदी बोले राजनीतिक रंग ना दें
बिल के पक्ष में बोलने की शुरूआत पीएम नरेन्द्र मोदी ने की। उन्होंने कहा कि पीएम बोले- जिसने महिलाओं के अधिकार का विरोध किया, उसका बुरा हाल हुआ,  पीएम ने कहा- हमारे देश में जब जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस जिसने विरोध किया है उसका हाल बुरे से बुरा किया है। ये भी देखिए 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। क्योंकि किसी ने विरोध नहीं किया। तब सब साथ में थे। आज भी मैं कहता हूं कि हम साथ जाते हैं तो इतिहास गवाह है कि ये किसी एक के पक्ष में नहीं जाएगा, ये देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा। हम सब उसके हकदार रहेंगे। इसलिए जिन को इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के परिणामों को देख लें। इसी में फायदा है जो नुकसान हो रहा है उससे बच जाओगे। इसलिए इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। पीएम मोदी ने कहा- इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सुबह से चर्चा चल रही है। काफी साथी यहां से भी जिन मुद्दों को स्पर्श किया गया है उसको तथ्यों और तर्क से सदन को जरूर जानकारी देंगे। इसलिए मैं उन विषयों में जाना नहीं चाहता। उन्होंने साफ किया कि बिल को लेकर दक्षिणी राज्यों को कोई घाटा नहीं होने जा रहा है।
अमित शाह ने बताया 850फार्मूला क्यों
अमित शाह ने कहा, 850 का आंकड़ा कहां से आया, मैं समझाता हूं। मानों 100 सीटें हैं जिसमें 33′ आरक्षण देना है तो उसमें 50 सीटें बढ़ाते है तो सीटें 150 होती हैं। 850 राउंड ऑफ फिगर है। कल इसके बारे में डिटेल में बताऊंगा।

प्रियंका गांधी का पीएम पर तंज, गृहमंत्री असहज
लोकसभा में बिल पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर तंज कसे। दरअसल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बहस पर उत्तर दे रहे थे। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि एक नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि 3 बिलों से साउथ के राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी। उन्होंने कहा, ‘लोकसभा की कुल 543 सीटों में दक्षिण राज्यों की 129 सीटें हैं। परिसीमन के बाद यह बढ़कर 195 हो जाएंगी। तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 होंगी। प्रियंका गांधी ने कहा, ‘वे (पीएम) कह रहे हैं कि उन्हें इसका श्रेय नहीं चाहिए। मैं कहती हूं कि बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को महिलाएं पहचान लेती है। सावधान हो जाइए नहीं तो पकड़े जाएंगे।
प्रियंका गांधी ने कहा, ‘543 में से महिलाओं को 33’ आरक्षण क्यों नहीं दे रहे। अगर पद खोने का डर नहीं तो कुछ लोग इसमें अपना पद खो दें। ताकि महिलाएं और ओबीसी वर्ग आ सके। ये आज ही कर दें, शुभ काम हो जाएगा काला टीका भी काम आ जाएगा।
सोनिया गांधी का रिएक्शन
महिला आरक्षण बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल पर कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने कहा, ‘मेरी पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मुझे इसमें कुछ और नहीं जोड़ना है। ‘
आप सांसद संजय सिंह 850 पर अड़े
सरकार के इस बयान पर कि सभी राज्यों में लोकसभा की सीटों में 50′ की बढ़ोतरी होगी। इस पर आप नेता संजय सिंह ने कहा कि उन्हें इसका फॉर्मूला बताना चाहिए कि यह कैसे किया जाएगा, लोकसभा की सीटों में 50′ की बढ़ोतरी कैसे होगी। अगर आप इसे 2011 की जनगणना के आधार पर कर रहे हैं, तो 2026 में जो जनगणना होने वाली है। उसको ध्यान में क्यों नहीं रख रहे। हम 33′ आरक्षण का समर्थन करेंगे, बशर्ते यह 543 सीटों के आधार पर लागू किया जाए।
गौरव गोगोइ बोले परिसीमन पर महिला कोटे का लेबल
गौरव गोगोई ने कहा, ‘यह कोई महिला आरक्षण बिल नहीं है। यह परिसीमन के इरादे से प्रेरित है, जिस पर महिला कोटे का लेबल लगा दिया गया है। यह शर्मनाक है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छिपाने के लिए महिला आरक्षण का इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘
असदुद्दीन ओवैसी ने किया बिल का विरोध
असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वह इस बिल को पेश किए जाने का विरोध करते हैं, क्योंकि यह संघवाद का उल्लंघन है। ओवैसी ने तर्क दिया कि यह कदम महिलाओं के आरक्षण के बारे में नहीं है, बल्कि इससे मुसलमानों का प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा, ज्दाया आबादी वाले राज्यों को और ज्दाया ताकत मिलेगी और संसदीय लोकतंत्र कमजोर होगा।
अखिलेश यादव ने उठाए मंशा पर सवाल
सपा प्रमुख सांसद अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब तक महिला आरक्षण का विरोध करने वाले रातों रात समर्थक कैसे हो गए। उन्होंने संसद सदस्यों की संख्या ८५० किए जाने को गैरवाजिब बताया। विपक्ष के कई सदस्य जिन्होंने चर्चा में भाग लिया बिल का समर्थन और सांसदों की संख्या ५२० किए जाने का जोरदार विरोध किया। महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि हमें महिला आरक्षण से कोई दिक्कत नहीं है। वे इसे तुरंत लागू कर सकते हैं, लेकिन इसमें परिसीमन को क्यों शामिल किया जा रहा है।

——————–महिला आरक्षण बिल सरकार की नजर————————

इसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण (33 प्रतिशत ) को लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया को सक्रिय करना है। सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पारित करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाया है। सरकार का उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को अतिशीघ्र अमली जामा पहनाना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्राविधान किया गया है। संभव है कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध न करे।
लोकसभा में सीटों की अधिकतम सीमा 850 तय की गई है
लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों में बढ़ोतरी के लिए परिसीमन के प्रस्ताव पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव होना तय माना जा रहा है। दक्षिण के राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण नए परिसीमन में उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं। सरकार ने इस आशंका को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सीटों की बढ़ोतरी हर राज्य के लिए एक समान 50 प्रतिशत होगी। लोकसभा में सीटों की अधिकतम सीमा 850 तय की गई है और किसी भी राज्य की सीटों में कटौती का सवाल ही नहीं उठता।
हर राज्य के लिए परिसीमन आयोग बनेगासरकार ने कहा कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए स्पष्ट और नया परिसीमन समय की सबसे बड़ी मांग है। परिसीमन प्रक्रिया आखिरी प्रकाशित जनगणना (2011) के आधार पर पूरी की जाएगी। राज्यों के लिए सीटों की संख्या तय नहीं है। हर राज्य के लिए परिसीमन आयोग बनेगा। आयोग राज्य के सभी दलों से चर्चा के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा।

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