नई दिल्ली। हंगरी की जनता ने मुख्य विपक्षी पार्टी तिसा को बहुत दिया है। राजधानी बुडापेस्ट में 16 साल के तानाशाही शासन के अंत का जश्न चल रहा है। हंगरी के तानाशाह ने आखिरकार चुनाव में हार स्वीकार कर ली है। इस तानाशाह को जनमत के आगे झुकना ही पड़ा। हालांकि अंतिम समय तक तानाशाह देश की जनता मेरे साथ है, की बातें करता रहा। लेकिन देश की जनता ने इस बार कुछ और ही सोचा हुआ था और वही हुआ जो देश की जनता चाहती थी यानि तानाशाही शासन का अंत और देश ने विपक्ष को सत्ता सौंप दी है।
चुनाव में विपक्षी तिसा को शानदार बहुमत
चुनाव में विपक्षी पार्टी तिसा को शानदार बहुमत मिला है। यह बदलाव इस चुनाव में पहले ही महसूस कर लिया गया था। आधिकारिक परिणामों के अनुसार, 97.35 प्रतिशत मतदान केंद्रों की गिनती के साथ, मैग्यार की मध्य-दक्षिणपंथी पार्टी ने 199 सीटों वाली संसद में 53.6 प्रतिशत वोटों के साथ 138 सीटें हासिल कीं, जबकि राष्ट्रवादी ओर्बन की फिडेज़ पार्टी को केवल 37.8 प्रतिशत वोटों के साथ 55 सीटें मिलीं।
देश के मतदाताओं ने रचा इतिहास
हंगरी के मतदाताओं ने इतिहास रच दिय है। राजधानी बुडापेस्ट में डेन्यूब नदी के किनारे जमा हुए हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए विजय भाषण में, मैग्यार ने कहा कि उनके मतदाताओं ने इतिहास को फिर से लिख दिया है। उन्होंने कहा, “आज रात सच्चाई ने झूठ पर विजय प्राप्त की। आज हम इसलिए जीते क्योंकि हंगरीवासियों ने यह नहीं पूछा कि उनकी मातृभूमि उनके लिए क्या कर सकती है; उन्होंने पूछा कि वे अपनी मातृभूमि के लिए क्या कर सकते हैं। आपने इसका उत्तर ढूंढ लिया और आपने उस पर अमल किया।” मैग्यार ने कहा कि उनकी पार्टी को संसद में दो-तिहाई बहुमत मिलने के संकेत ऐतिहासिक जनादेश का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने सभी हंगेरियन लोगों को एकजुट करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक हंगरी के इतिहास में, इतने अधिक लोगों ने पहले कभी मतदान नहीं किया है, और किसी भी एक पार्टी को टिस्ज़ा जैसा मजबूत जनादेश कभी नहीं मिला है।”
Leave a comment