नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच समझौता आसान नहीं है। दोनों अविश्वास से भरे हुए है।पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के समकक्षाें के बीच हो रही समझौता वार्ता अमेरिका के लिए कतनी अहम है इस बात का अंदाजा यूएस के उप राष्ट्रपति की इस वार्ता में मौजूदी से लगाया जा सकता है, लेकिन बातचीत के दौरान ईरानी की इजरायल या ईरान जैसी शर्तें डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की अग्नि परीक्षा साबित होंगी। रान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ का कहना है कि इस्लामाबाद में हो रही महत्वपूर्ण वार्ता का परिणाम पूरी तरह से अमेरिकी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि समझौता तभी संभव है जब अमेरिकी प्रतिनिधि “इज़राइल पहले” के एजेंडे के बजाय अपने “अमेरिका पहले” के हितों पर ध्यान केंद्रित करें। इसके अलावा वार्ता से ठीक पहले इजरायल की लेबनान पर भारी बमबारी में करीब तीन सौ की मौत की घटना ने इस्लामाबाद में हो रही वार्ता पर पहले ही सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप का अभी भी ईरान को धमकाने वाला स्टाइल है। जिसके चलते ईरान से समझौता आसान नहीं नजर आ रहा है।
दोनों के पक्ष
वाशिंगटन का प्रतिनिधित्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर कर रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने जर्मन समकक्ष जोहान वाडेफुल से कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत में “पूर्ण अविश्वास” के साथ प्रवेश कर रहा है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के नेता और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि यदि अमेरिका समझौता चाहता है तो उसे ईरान के अधिकारों को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ईरान सद्भावना से इस्लामाबाद आया है, हालांकि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। ‘मिनाब 168’ पाकिस्तान में ईरान के 71 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपना नाम उन 168 स्कूली छात्राओं और शिक्षकों के नाम पर रखा है, जो संघर्ष की शुरुआत में एक प्राथमिक विद्यालय पर अमेरिकी हमलों में मारी गई थीं। प्रतीकात्मक महत्व के अलावा, प्रतिनिधिमंडल का आकार यह दर्शाता है कि ईरान वार्ता को बहुत गंभीरता से ले रहा है।
अमेरिका पूरी तरह से गंभीर
ईरान के साथ वार्ता को लेकर अमेरिका पूरी तरह से गंभीर है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाय जा सकता है कि इजरायल ने लेबनान पर एयर स्ट्राइक रोक दी हैं। इतना ही नहीं लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि अमेरिकी विदेश विभाग में मंगलवार को एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें “युद्धविराम की घोषणा और अमेरिकी तत्वावधान में लेबनान और इजराइल के बीच वार्ता शुरू करने की तारीख पर चर्चा की जाएगी”। इसके लिए इजरायल को तैयार करने का काम अमेरिका ने किया है।
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