मेरठ/ शहर की घनी आबादी वाले हापुड़ रोड करीम नगर इलाके में जहां शहर विधायक रफीक अंसारी का आवास है, वहां आसपास तमाम मकानों पर पलायन के पोस्टर लग गए हैं। यह पूरा इलाका नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और स्टाफ की वजह से नरक में तब्दील हो गया है। दरअसल यहां कुछ लोग पशु डेयरियां संचालित कर रहे हैं। इन डेयरियों में तीन-तीन सौ पशु बताए जाते हैं। इन डेयरियों से निकलने वाला गोबर बजाए दूर दराज ठिकाने लगाने के नालियों में बहा दिया जाता है। जिसकी वजह से शहर विधायक के इलाके तमाम नाले नालियां चौक हो गयी हैं। नाले नालियां चौक हो जाने की वजह से इनकी गंदगी सड़कों पर फैल जाती है। वहां के हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों का अब गली मोहल्लों से निकलना भी दुश्वार हो जाता है। यह समस्या को ई आज कल या फिर महीने या साल की नहीं बल्कि बीते लंबे अरसे से यह समस्या बनी हुई, लेकिन अब यहां के हालात बद से बदत्तर और बर्दाश्त से बाहर हो चुके हैं। नाम ना छापे जाने की शर्त पर लोगों ने बताया कि वहा तमाम जतन कर थक चुके हैं और डेयरी संचालक से उलझने की ताकत उनमें है नहीं ऐसे में बेहतर यही होगा कि अपने घर परिवार को लेकर यहां से पलायन कर लिया जाए। उनका कहना है कि डेयरी संचालकों की बात करें तो वो बात करने के नाम पर लाठी निकाल लाते हैं या फिर उनके मुंह से गालियां बरसती हैं। इसलिए यहां से पलायन करना बेहतर है।
हर जगह की जा चुकी फरियाद
करीमनगर के इस इलाके के लोग डेयरियों की मुसीबत के लिए तमाम जगहों पर फरियाद कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनका शिकायती पत्र लेने वाले तमाम अफसर बातें तो बहुत करते हैं लेकिन आज तक किसी ने भी कार्रवाई की हिम्मत नहीं दिखाई। लगता है कि सिस्टम को चलाने वाले खासतौर से नगर निगम के अफसर भी डेयरी संचालकों से खौफ खाते हैं। जब अफसरों का यह हाल है तो फिर आम आदमी की क्या बिसात है। वो बताते हैं कि एक बार नहीं अनेक बार वो अफसरों से इन डेयरियों पर कार्रवाई की फरियाद कर चुके हैं। लेकिन फरियाद पर अफसरों का मन नहीं पिघलता। ऐसे में उनको फिर यही समझ आया कि यहां से मकान बेचकर पलायन कर जाएं, लेकिन इस इलाके की हालात इतनी ज्यादा खराब है कि यहां कोई मकान तक खरीदने को तैयार नहीं। यहां तक कि बेहद कम दामों पर भी यहां कोई मकान खरीदने को तैयार नहीं।
घरों में गोबर और गंदगी
शहर विधायक के आसपास के इलाके की बात की जाए तो यहां डेयरियों के गोबर की वजह से नाले नालियां पूरी तरह से चौंक हो गयी हैं। थोड़ी सी बारिश होने भर से यहां नाले नालियां उफनने लगती हैं। नालियों की गदंगी घरों में भर जाती है। जब नालियों की गंदगी घरों में भरने लगेगी तो अंदाजा लगा लीजिए कि वहां का क्या हाल होगा। केवल घरों में ही नहीं घरों के आसपास भी बुरा हाल है।
सफाई के नाम पर खेल
आसपास के लोगों ने नाम ना छापे जाने की शर्त पर बताया कि जिस नरक की वजह से लोग पलायन के लिए मजबूर हैं उसमें नगर निगम के सफाई अफसरों का भी बड़ा खेल है और इस खेल में पूरा सिस्टम लिप्त है। मसलन यदि इस इलाके के लिए तीस सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं तो उनमें से महज पांच या फिर छह कर्मचारी ही काम पर आते हैं। बाकि कर्मचारी आते ही नहीं लेकिन उनकी हाजरी जरूर लग जाती है। और यदि कभी अचानक जांच हो जाती है तो उस दिन इन कर्मचारियों को गैर हाजिर दिखा दिया जाता है। पूरा खेल बहुत ही सिस्टमेटिग तरीके से चल रहा है, जिसकी वजह से केवल यह इलाका ही नहीं सफाई के नाम पर भारी भरकम बजट होने के बाद भी सफाई के नाम पर शहर की हालात नारकीय बनी हुई है।
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