अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी पर रामनगरी अयोध्या पूरी तरह राममय हो उठी। राम जन्मभूमि मंदिर और आस‑पास के मंदिरों में हजारों श्रद्धालु जुटे, जहां “भए प्रकट कृपाला दीनदयाला” की स्तुतियों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। रामलला के जन्म के शुभ क्षण पर उत्सव का माहौल ऐसा रहा, जैसे पूरी नगरी भगवान राम की उपस्थिति में डूब गई हो।
कनक भवन और हनुमानगढ़ी में भक्ति गीतों की धुन पर झूमते‑नाचते श्रद्धालु दिखे। लोगों ने रामभक्ति की कीर्तन‑भजनों के बीच रामलला का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। पूरे दिन जय श्रीराम के जयघोष से शहर के हर कोने में आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।

मौसम ने भी ली करवट
इस पावन अवसर पर मौसम ने भी आशीर्वाद देने वाला माहौल बनाया। सुबह तक हल्की बारिश और ठंडक के कारण मौसम सख्त बना हुआ था, लेकिन जैसे‑जैसे राम जन्म का समय आया, आसमान साफ हो गया और धूप निकल आई। राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में सूर्य की किरणें रामलला के ललाट पर पड़ीं, जिन्हें श्रद्धालु दिव्य अभिषेक के रूप में मान बैठे। इस अद्भुत दृश्य ने भक्तों की आस्था को और भी प्रगाढ़ कर दिया और लोगों का कहना था कि यह भगवान राम की विशेष कृपा और उपस्थिति का संकेत है।
दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक
रामनवमी की खास घटना थी दोपहर 12 बजे का सूर्य तिलक। ठीक उसी समय, जब भगवान राम के जन्म का क्षण माना जाता है, सूर्य की रश्मियों से रामलला के ललाट पर लगभग चार मिनट तक तिलक किया गया। विज्ञान‑आधारित तकनीक की मदद से यह आयोजन संभव हुआ, जिसे देखने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालु भाव‑विभोर हो गए। रामनगरी के हर घाट, मंदिर और मोहल्ले में यही महसूस हो रहा था कि भगवान राम आज सबके बीच मौजूद हैं।
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