तीन हफ्ते में सच्चाई सामने लाने का आदेश
अगली सुनवाई तक खनन पर पूरी रोक
रिपोर्टर – उदयवीर चौधरी
चौसाना। शामली के नाई नांगला और मंगलौरा क्षेत्र में यमुना नदी के सीने को चीरकर हो रहे कथित अवैध खनन पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख दिखाया है। डॉ. अमित कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधिकरण ने साफ कहा कि बिना पर्यावरण स्वीकृति कोई भी खनन स्वीकार नहीं है।
याचिका में आरोप है कि मेसर्स यमुना माइंस बिना जरूरी अनुमति के भारी मशीनों से लगातार खनन कर रही है, जबकि पर्यावरण स्वीकृति अब तक लंबित है। तस्वीरों और दस्तावेजों के जरिए खनन जारी होने की बात रखी गई।
सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर उठ रहा है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना और घटनास्थल के पास ही पुलिस चौकी होने के बाद भी खनन जारी रहना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण मंत्रालय और शामली प्रशासन की संयुक्त समिति बनाकर तीन सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक किसी भी कीमत पर अवैध खनन नहीं होना चाहिए। मामला अब तीन जुलाई 2026 को फिर सुना जाएगा।
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