मेरठ। हादसों से सबक ना सीखना या एक हादसे के बाद उस पर लीपापोती कर दूसरे हादसे का इंतजार करना लगता है सिस्टम चलाने वालोें की आदत में शुमार हो गया है। मेरठ में बड़ी संख्या में ऐसे स्वीमिंग पूल हैं जिनके संचालन की ना तो अनुमति ली गयी है ना ही मानकों के मुताबिक उन्हें चलाया जा रहा है। इसीलिए पूछा जा रहा है कि ऐसे स्वीमिंग पूलों को नेता चलवा रहे हैं या फिर अफसर। लिसाड़ी क्षेत्र जनकपुरी इलाके में हादसों में मासूम की मौत के बाद भी ऐसे स्वीमिंग पूल यदि चल रहे हैं तो इसके लिए कसूरवार कौन है। हैरानी की बात तो यह है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी अफसर सुप्तावस्था में नजर आ रहे हैं। ऐसे हादसे आइंदा ना हों, इसके लिए फिलहाल हाथ पांव हिलाते नहीं दिख रहे हैं। प्रशासन या संबंधित विभागों के पास इनकी सही संख्या और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) संबंधी कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पूर्व में भी कई हादसे हो चुके हैं। इस साल जनकपुरी इलाके के अलावा पिछले साल भी पुल में एक किशोर की दर्दनाक मौत हो गयी थी। समय पर उसे इलाज तक नहीं मिला था।
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