नई दिल्ली। इजरायली हमलों में 19 बेकसूर लेबनानियों की मौत से मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर यूरोपियन संघ ने कठोर शब्दों में इजरायली हमलों की निंदा की है। कई अन्य देशों ने भी 19 लेबनानियों की मौत को बर्बर बताया है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने लेबनान और इजरायल में सीजफायर का एलान किया था। अमेरिका की मध्यस्थता से 17 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन इज़राइल ने अपने हमले जारी रखे हैं। उसके सैनिक सीमा के साथ लेबनान के अंदर 10 किलोमीटर (6.2 मील) तक के क्षेत्र पर कब्ज़ा किए हुए हैं और नागरिकों को वापस न लौटने की चेतावनी दे रहे हैं। इजरायल ने तब प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि सीजफायर के एलान के बाद भी उसके हमले जारी रहेंगे और आज उसने लेबनान पर भारी बमबारी कर 19 को मार डाला। वहीं दूसरी ओर लेबनान पर इजरायली हमलों का दौर जारी है। भारी हमले किए जा रहे हैं। इनमें संपत्ति का भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
मदद की दरकार
इजरायली हमलों से बेहाल लेबनानियों को मदद की दरकार है, लेकिन वहां तक मदद पहुंचाने का कोई जरिया नहीं बन पा रहा है। यूरोपीय संघ की संकट प्रबंधन प्रमुख हाजा लाहबीब ने दक्षिणी लेबनान में मानवीय सहायता पहुंचाने की मांग की है, जहां इजरायल ने हमले जारी रखे हैं और हिजबुल्लाह ने वर्तमान में लागू “युद्धविराम” के बावजूद जवाबी हमले किए हैं। एक संवाददाता सम्मेलन में लहाबीब ने कहा, “मानवीय सहायता तैयार है, लेकिन अक्सर यह उन लोगों तक नहीं पहुंच पाती जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है।”“हमें अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूर्ण सम्मान करते हुए मानवीय सहायता पहुंचाने की आवश्यकता है। अगर सहायता लोगों तक नहीं पहुंच पाएगी तो वह जान नहीं बचा पाएगी,” लाहबीब ने कहा।
वहीं दूसरी ओर स्ट्रेट होर्मूज खोलने को लेकर यूएस नेवी और ईरान के इस्लामिक रिपब्लिकन गार्ड कोर के दस्ते के बीच हुए टकराव के बाद हालात खराब हो गए हैं। स्ट्रेट होर्मूज को लेकर नए मोर्चों भी खुल गए हैं, लेकिन सबसे चौंकाने वाली घटना यूएस नेवी के युद्धक का ईरानी हमलों के बाद वहां से बचकर भाग निकलना रहा। हालांकि टकराव के बावजूद दोनों देशों में शांति प्रस्तावों का भी आदान प्रदान हो रहा है। यह शांति प्रस्ताव एक दूसरे के पास पाकिस्तान की मार्फत भेजे जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट जो देश अमेरिका परस्त हैं उनको ईरान की ओर से लगातार चेतावनी भी दी जा रही है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी, 2026 को ईरान के खिलाफ शुरू किया गया युद्ध संभवतः अमेरिकी वापसी में समाप्त होगा। अमेरिका विनाशकारी परिणामों के बिना युद्ध जारी नहीं रख सकता। एक बार फिर से तनाव बढ़ने से क्षेत्र के तेल, गैस और विलवणीकरण बुनियादी ढांचे का विनाश हो सकता है, जिससे एक दीर्घकालिक वैश्विक आपदा उत्पन्न हो सकती है। ईरान ऐसे गंभीर परिणाम भुगतने को मजबूर कर सकता है जो अमेरिका सहन नहीं कर सकता और जिसे दुनिया को भुगतना नहीं चाहिए।
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