शहद फैक्ट्री से फैल रहे भीषण प्रदूषण के कारण मचा है पूरे इलाके में हाहाकार
मेरठ। दिल्ली एनसीआर के मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के गेसूपुर बफावत गांव में एक शहद फैक्ट्री के प्रदूषण से त्रस्त ग्रामीणों ने सामूहिक पलायन की चेतावनी दी है, जिसके बाद यूपीपीसीबी ने फैक्ट्री प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। इस फैक्ट्री परिसर में पूर्व में राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा 36 घंटे से अधिक समय तक छापेमारी की कार्रवाई भी की जा चुकी है। शहद फैक्ट्री से फैल रहे भीषण प्रदूषण के कारण हाहाकार मचा हुआ है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के साए में जी रहे इस गांव के लोगों का कहना है कि सिस्टम चलाने वाले सुप्तावस्था में हैं। ऐसे में उनके पास अपना घर छोड़कर पलायन करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं, क्योंकि यदि यहां रहे तो कभी भी मौत कैंसर बनकर उनकी जिंदगी पर झपट्टा मार सकती है। जिंदा रहने के लिए यहां से पलायन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं।
शहर फैक्ट्री को थमाया नोटिस
गांव में गहराते संकट और ग्रामीणों द्वारा सोशल मीडिया व धरातल पर पलायन की चेतावनी देने के बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने सख्त कदम उठाया है। विभाग ने फैक्ट्री संचालकों को आधिकारिक नोटिस जारी कर कई बिंदुओं पर जवाब तलब किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले केमिकल युक्त और दूषित पानी की वजह से गांव में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां पैर पसार रही हैं, जिसके कारण पूरा गांव मौत के साए में जीने को विवश है।
डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) का छापा
करीब 6 महीने पहले (अप्रैल 2026 में), डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की टीम ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर इस फैक्ट्री पर बेहद गोपनीय और बड़ी छापेमारी की थी। यह जांच लगातार 36 घंटे से अधिक समय तक चली थी। यह फैक्ट्री गांव के ही निवासी दीपक और शैलेंद्र (पुत्र बलराज सिंह) की बताई जाती है। उस दौरान ग्रामीणों ने बड़े स्तर पर नकली शहद बनाने और वित्तीय हेराफेरी की शिकायतें की थीं, जिसके बाद परिसर को पूरी तरह सील कर जांच की गई थी।,
बद से बदत्तर हैं हालात
फैक्ट्री से लगातार बिना ट्रीटमेंट के छोड़े जा रहे जहरीले अपशिष्ट ने गेसूपुर बफावत के भूजल को पूरी तरह प्रदूषित कर दिया है। हैंडपंपों से निकलने वाला दूषित पानी फसलों को बर्बाद करने के साथ-साथ इंसानों और मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इस गांव में रहने वालों का कहना है कि
“हम सालों से इस प्रदूषण को झेल रहे हैं। अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगर इस फैक्ट्री को तुरंत बंद या स्थानांतरित नहीं किया गया, तो हमारे पास गांव से पलायन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।” फिलहाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस के बाद ग्रामीणों को उचित कार्रवाई की उम्मीद है, लेकिन उनका साफ तौर पर कहना है कि जब तक जमीन पर बदलाव नहीं दिखता, उनका विरोध और पलायन का फैसला वापस नहीं होगा।
Leave a comment