Home मेरठ रक्षा मंत्रालय व CVC सख्त टूटेगा बंगला 210 कैसल व्यू
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रक्षा मंत्रालय व CVC सख्त टूटेगा बंगला 210 कैसल व्यू

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रक्षा मंत्रालय व CVC सख्त टूटेगा बंगला 210 कैसल व्यू
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नवाब की कोठी को विवाह मंडप और कामर्शियल इवेंट वेन्यू में तब्दील किए जाने का मामला केंद्रीय सतर्कता आयोग पहुंचा

मेरठ। रक्षा मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग व महानिदेशक रक्षा संपदा सख्त हैं जिसके चलते छावनी वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला 210 केसल व्यू जल्द ही ध्वस्त होता नजर आएगा। यह कार्रवाई ठीक सेंट्रल मार्केट के तर्ज पर हो सकती है। नगर निगम की जेटिंग मशीन के छावनी वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला नंबर 210 जो विवाह मंडप में तब्दील कर दिया गया है, का मामला सामने आने के बाद नगर निगम के जिस अफसर के इशारे पर जेटिंग मशीनें भेजी गयीं वो तो जांच के दायरे में आ ही गए साथ ही भारत सरकार के इस बंगले में अवैध विवाह मंडप बनाए जाने को लेकर इस बंगले की तमाम परतें खुलनी शुरू हो गयी हैं। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले मेरठ छावनी के वेस्ट एंड रोड स्थित बंगला नंबर 210 (नवाब की कोठी) को एक आलीशान विवाह मंडप और कामर्शियल इवेंट वेन्यू में तब्दील किए जाने का मामला अब जन-आक्रोश और प्रशासनिक विफलता के गंभीर आरोपों के घेरे में है。 तमाम नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर रक्षा संपदा अधिकारी (DEO) कार्यालय और कैंटोनमेंट बोर्ड के सी ईओ सरीखे तमाम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे एक बड़ा घोटाला करार दिया है। इतना ही नहीं इस मामले की रक्षा मंत्रालय की उच्च पदस्थ कमेटी या फिर सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग की जा रही है। इस बंगले का यह विवाह मंडप छावनी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा साबित हो सकता है, इस आशंका से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।

ताक पर कैंट एक्ट

नियमों के मुताबिक, छावनी परिषद (Cantonment Board) और रक्षा संपदा कार्यालय (DEO Office) के अंतर्गत आने वाले पुराने अनुदान (Old Grant) वाले या रिहायशी कोटे के बंगलों में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या उनका व्यावसायिक उपयोग (Commercial Use) पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। इसके बावजूद, बंगला नंबर 210 के विशाल परिसर में धड़ल्ले से ‘द ग्रैंड कैसल’ नामक बैंकविट हॉल संचालित हो रहा है। नागरिकों का आरोप है कि रिहायशी परिसर में सैकड़ों-हजारों लोगों की भीड़ जुटाकर व्यावसायिक गतिविधियां चलाना सीधे तौर पर रक्षा मंत्रालय के भूमि नियमों का खुला उल्लंघन है।

DEO व CEO कैंट के निगरानी तंत्र पर सवाल

निगरानी तंत्र कहां सोया था जो इतने बड़े पैमाने पर रिहायशी बंगले को मैरिज होम में तब्दील करने में समय लगा होगा, तो क्या अधिकारी इस अवैध निर्माण और व्यावसायिक संचालन से पूरी तरह अनजान बने रहे और आज भी अंजान बने हुए हैं। इससे साफ जाहिर है कि इस अवैध विवाह मंडप को बनाने में DEO व CEO कैंट का खुला संरक्षण हासिल था। इन अफसरों की मिलीभगत के चलते ही कैंट के प्राइम लोकेशन पर बिना वरिष्ठ अधिकारियों के कथित “आशीर्वाद” या मिलीभगत के ऐसा अवैध व्यावसायिक खेल मुमकिन नहीं है।

भ्रष्टाचार नहीं तो और क्या

ओल्ड ग्रांट बंगलों और कैंट भूमि की जमीनों पर इस तरह के अवैध उपयोग देश की सुरक्षा और सरकारी संपत्ति के संरक्षण के लिहाज से बेहद गंभीर हैं। मामला केवल 210 तक ही सीमित नहीं। ओल्ड ग्रांट के तमाम ऐसे रिहायशी बंगले हैं जो होटल और मल्टी नेशनल कंपनियों के शोरूम खोलकर खुलेआम कैंट एक्ट की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वेस्ट एंड रोड का बंगला 210 हो या सरकुलर हो या फिर आबूलेन अफसरों के भ्रष्टचार के जीते जागते सबूत हैं।

सुप्रीमकोर्ट सख्त ध्वस्त होगा कैसल व्यू

गौरतलब है कि मेरठ में रिहायशी संपत्तियों को व्यावसायिक रूप में बदलने और अवैध निर्माणों पर देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) पहले ही बेहद सख्त रुख अपना चुकी है। हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने मेरठ के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों अवैध कमर्शियल संपत्तियों को तत्काल प्रभाव से सील और ध्वस्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि नियमों के उल्लंघन और अधिकारियों की लापरवाही से यदि कोई बड़ा हादसा होता है, तो संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे में वेस्ट एंड रोड के इस तथाकथित रिहायशी बंगले में फल-फूल रहा विवाह मंडप सीधे तौर पर कानून को चुनौती दे रहा है। क्षेत्र के लोगों ने अब रक्षा मंत्रालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और महानिदेशक रक्षा संपदा (DGDE) से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार DEO कार्यालय के दोषी अधिकारियों व भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इसको लेकर शहर के बड़े आरटीआई एक्टिवस्ट ने रक्षा मंत्रालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग व महानिदेशक रक्षा संपदा से 210 बंगले के संबंध में RTI की मार्फत जानकारियां भी मांगी हैं।
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