यूपी भाजपा में विधानसभा चुनाव से पहले सब कुछ ठीक नहीं है आ रहा नजर, दिग्गत करेंगे साइकिल की सवारी
नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले रुहेलखंड क्षेत्र में एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। आंवला लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो बार के पूर्व सांसद और बड़े ओबीसी नेता धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया है। 11 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद उन्होंने अपनी बेटी कीर्ति कश्यप और समर्थकों के साथ पार्टी की सदस्यता ली।
भारतीय जनता पार्टी के ग्रह नक्षत्र इन दिनों खराब चल रहे हैं। पहले धर्मेंन्द्र प्रधान का इस्तीफा और अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को दिल्ली में बवाल और सुप्रीमकोर्ट की सख्ती, लेकिन इससे भी बड़ी आफत यूपी में नजर आ रही है। विधानसभा से पहले अचानक भाजपा को सपा सुप्रीमो ने जोर का झटका धीरे से दिया है। ओबीसी वोटों में मजबूत पकड़ रखने वाले धर्मेंद्र कश्यप के साइकिल की सवारी कर चुके हैं। यूपी के कई दिग्गजों के साइकिल की सवारी करने की बात भाजपा हलकों में गूंज रही है। भले ही दिल्ली दरबार का रास्ता वाया यूपी होकर जाता हो, लेकिन जानकारो की मानें तो जो कुछ घटनाक्रम हुआ है और होने वाला है उसके निहितार्थ तलाशें जाएंगे तो कहीं ना कहीं यूपी में अपनों की ही योगी को डेमेज करने की प्लानिंग पर काम चल रहा है। और इसके पीछे भगवा खेमे के एक प्रभावशाली ग्रुप का नाम लिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि आंवला लोकसभा सीट से 2014 और 2019 में सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने रविवार को साइकिल की सवारी तक यह सिलसिला थमने वाला नहीं। इसके आगे बढ़ने के आसार भी साफ नजर आ रहे हैं। याद रहे कि धर्मेन्द्र कश्यप बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर 2002 में पहली बार विधायक बने। साल 2007 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। साल 2013 में वे भाजपा में शामिल हो गए थे। अब सपा ने उन्हें अपने साथ जोड़कर बरेली के आसपास कई जिलों में कश्यप वोटों में पैठ बढ़ाने का प्रयास किया है।
भाजपा को इन सीटों पर नुकसान संभव
भाजपा द्वारा उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के टिकटों की घोषणा (विशेषकर बरेली क्षेत्र से धर्मपाल सिंह और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाए जाने) के बाद टिकट न मिलने से नाराज होकर धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इन सीटों पर नुकसान संभव धर्मेंद्र कश्यप रुहेलखंड और उसके आसपास के जिलों (बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहाँपुर) में अति-पिछड़े वर्ग (विशेष रूप से कश्यप, बिंद, मल्लाह और निषाद समाज) के एक कद्दावर नेता माने जाते हैं। उनके सपा में जाने से भाजपा के वोट बैंक और चुनावी समीकरणों को सीधा नुकसान पहुंच सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मेंद्र कश्यप की इस क्षेत्र की करीब 9 से 25 विधानसभा सीटों पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डालने की क्षमता है। कश्यप और निषाद बाहुल्य इन सीटों पर उनका व्यक्तिगत प्रभाव भाजपा के पारंपरिक गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। बरेली और बदायूं जिलों को मिलाकर बनी आंवला लोकसभा के अंतर्गत आने वाली सभी विधानसभा सीटों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा। चर्चा है कि कश्यप अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं।
सपा के ‘PDA’ को मजबूती
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके शामिल होने पर बयान दिया कि धर्मेंद्र कश्यप के आने से सपा का ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) आंदोलन रुहेलखंड में और समर्थ व सशक्त होगा। चुनाव नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश में नेताओं का दलबदल और तेज होने की संभावना है। धर्मेंद्र कश्यप का भाजपा से जाना रुहेलखंड के पिछड़े वर्ग के समीकरणों में भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
ये भी हैं रूठे हुए
पिछले दिनों योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बयान दिया था कि पूरी भाजपा सपा में शामिल होने को बैठी है। वहीं दूसरी ओर धर्मेन्द्र कश्यप के अलावा जिनके रूठे होने की चर्चा हवाओं में है उनमें मोहनलाल गंज के पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री रहे कौशल किशोर जिन्हें मजबूत दलित जनाधार वाला नेता कहा जाता है इन दिनों भाजपा से से नाराज चल रहे हैं। उन्राव से सांसद साक्षी महाराज के बयान भी भाजपा को परेशान करने वाले माने जा रहे हैं। साक्षी महाराज ने तो लोधों के भाजपा से छिटने की बात कही है, लेकिन यदि लोधे भाजपा से छिटकते हैं तो उनका सीधे सपा की झोली जाना तय माना जा रहा है। सबसे चौंकाने वाला बयान तो भाजपा से कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने दिया। बृजभूषण शरण सिंह ने तो खुलकर अखिलेश यादव की तारीफ कर लगता है कि आने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अपना रूख साफ करने का प्रयास किया है। इनके अलावा पिछले दिनों विधान परिषद चुनाव में गोरखपुर-अयोध्या शिक्षक सीट पर संजयन त्रिपाठी भाजपा से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने शर्मा गुट के ध्रुव त्रिपाठी को टिकट दे दिया। बगावत कर संजय सपा के प्रत्याशी बन गए। ऐसा ही अंदरुनी घमासान आगरा एवं प्रयागराज-झांसी खंड में भी देखा जा रहा है।
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