मेरठ। भारतीय किसान यूनियन के धरने प्रदर्शन के दौरान पुलिस के आला अफसर बैकफुट पर नजर आए। इस प्रकार के धरना प्रदर्शन के दौरान अक्सर आस्तीन चढ़ाकर आंखें लाल करने वाले पुलिस के अफसरों का रवैया पूरी तरह हैरानी भरा और बदला हुआ नजर आया। आंखें के बजाए उनके हाेठ लाल थे। मसलन किसान नेताओं के बीच वो खुशामदी अंदाज में नजर आए। दो हजार से ज्यादा किसानों ने कमिश्नरी को घेर लिया था। भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में किसानों का हुजूम पहुंचा था। मंगलवार करीब सवा 11 बजे करीब 2000 किसान अभी कमिश्नर आफिस के बाहर पहुंचे। मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन के अफसरों ने किसानों के कमिश्नरी में घुसने की आशंका के चलते कमिश्नर ऑफिस के मेन गेट पर ताला लगवा दिया। वहां भारी पुलिस फोर्स लगा दी गयी। इसके अलावा भी इस प्रकार के धरने प्रदर्शनों से निपटने के लिए जो कुछ बंदोबस्त अफसर कराते हैं वो सभी किए गए थे।
चेतावनी से मचा हड़कंप
कमिश्नरी घेराव को जब करीब एक घंटे से ज्यादा का अरसा बीत गया तो भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने धरने के दौरान प्रशासन को चेतावनी दे डाली। कहा- तानाशाह अधिकारियों के लिए खुली चेतावनी है। हम यहां 2 घंटे से धरने पर हैं और कोई ध्यान नहीं दे रहा है। अगर 10 मिनट में कमिश्नर ने ज्ञापन स्वीकार नहीं किया। नहीं तो किसके गेट टूटेंगे और क्या होगा नहीं पता। हालांकि थोड़ी देर में ही कमिश्नर के अफसर पहुंचे और किसानों ने उन्हें ज्ञापन सौंप दिया। कमिश्नर ऑफिस के बाहर मंडलायुक्त के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपने के बाद किसान डीएम व एसएसपी को ज्ञापन सौंपने के लिए कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ गए।
सब कुछ किसान मय
दो हजार से ज्यादा का किसानों का जब हुजूम जमा हो तो सब कुछ किसानों के रंग में खुद ही रंग जाता है। पुलिस प्रशासन के जो अफसर किसानों के धरने के मद्देनजर लगाए गए थे वो भी किसानों के अंदाज में आ गए। अफसरों का सबसे ज्यादा ध्यान इसी बात पर था कि उनकी कोई बात किसानों को बुरी ना लग जाए। वहीं दूसरी ओर किसानों की यदि बात करें तो वो भी पूरी तैयारी से आए थे। उनके पास तमाम इंतजाम थे बारिश से बचने का भी और धूप से बचने का भी। वहीं दूसरी ओर जहां-जहां से भी किसान गुजरे वहां चक्का जाम हो गया। जाम में फंसे लोग हलकान नजर आए, लेकिन अफसरों का सारा जोर बजाए जाम में फंसे लोगों को राहत पहुंचने के किसी तरह किसानों की वापसी पर रहा। भाकियू के बैनर तले कमिश्नरी पर पहुंचे किसान आज पूरे रंग में नजर आए। तमाम ऐसे युवा किसान थे जो मस्ती में झूम रहे थे, वहीं दूसरी ओर बुर्जुग किसान दिल्ली जंतर मंतर से संसद कूच के दौरान युवाओं पर खाकी की लाठियों से खासे नाराज दिखाई दिए। उनका कहना था कि इस सरकार का इलाज किसानों के अलावा कोई नहीं कर सकता।
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