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शहर की सड़कों पर मंदिर और मजार क्यों

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शहर की सड़कों पर मंदिर और मजार क्यों
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मेरठ। शहर की सड़कों व नाले नालियों पर मंदिर और मजारों को लेकर एडवोकेट रामकुमार शर्मा ने नगरायुक्त को लीगल नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। सड़कों पर मंदिर मजारों को उन्होंने संविधान का उल्लंघन बताया है। सार्वजनिक सड़कों, नालों एवं सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्मित धार्मिक एवं अन्य अतिक्रमणों को हटाने में घोर लापरवाही, वैधानिक कर्तव्यों के उल्लंघन, जनसुरक्षा को संकट में डालने के अंतर्गत उत्पन्न होने वाले नागरिक दायित्व के संबंध में यह विधिक नोटिस जारी किया गया है।

यह कहा गया है नोटिस में

नोटिस में एडवोकेट रामकुमार शर्मा ने कहा है कि नगर निगम तथा उसके अधिकारियों का वैधानिक एवं सार्वजनिक दायित्व है कि वे सार्वजनिक सड़कों, नालों, चौराहों एवं सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त रखते हुए नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं सुचारू नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराएं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत सभी नागरिकों को विधि के समक्ष समानता प्राप्त है तथा अनुच्छेद 25 के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य एवं नैतिकता के अधीन है। किसी भी व्यक्ति अथवा समुदाय को सार्वजनिक भूमि, सड़क अथवा नाले पर अतिक्रमण कर धार्मिक निर्माण करने का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2009 में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को सार्वजनिक स्थलों पर अवैध धार्मिक संरचनाओं के निर्माण पर रोक लगाने तथा पूर्व से विद्यमान अवैध संरचनाओं के संबंध में विधिसम्मत कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए थे। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा भी समय-समय पर सार्वजनिक भूमि एवं मार्गों पर किए गए अतिक्रमणों को हटाने तथा प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद मेरठ नगर में अनेक स्थानों पर सार्वजनिक सड़कों, नालों एवं सरकारी भूमि पर अवैध धार्मिक संरचनाएं यथावत बनी हुई हैं। शहर में सिविल कोर्ट के बाहर नाले के ऊपर निर्मित मंदिर। सिविल लाइन क्षेत्र के जसवंत राय हॉस्पिटल के सामने सड़क पर निर्मित मंदिर। खैरनगर क्षेत्र में स्थित अवैध मज़ार, जिससे सम्पूर्ण चौराहा प्रभावित है। रुड़की रोड, लेखा नगर के समीप स्थित बड़ी मज़ार। मेघदूत नाले के चौराहे के समीप नाले के किनारे निर्मित मंदिर तथा अन्य अनेक अतिक्रमण शामिल हैं। नोटिस में कहा गया है कि इन अवैध अतिक्रमणों के कारण वर्षा ऋतु में जलभराव, सफाई व्यवस्था में बाधा, यातायात अवरोध, जाम एवं दुर्घटनाओं की आशंका में निरंतर वृद्धि हुई है। ऐसी परिस्थितियाँ नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं। अनेक स्थानों पर इन अवैध संरचनाओं को हटाने के स्थान पर उनके नीचे अथवा आसपास नालों एवं अन्य निर्माण कार्य कराकर उन्हें अप्रत्यक्ष संरक्षण प्रदान किया जा रहा है, जो शासन की मंशा, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की भावना के प्रतिकूल है। यदि किसी सार्वजनिक प्राधिकारी की घोर लापरवाही, निष्क्रियता अथवा वैधानिक दायित्वों के पालन में विफलता के कारण नागरिकों को क्षति पहुँचती है, तो क्षतिपूर्ति एवं अन्य विधिक दायित्व उत्पन्न होते हैं।

यह किया जाए

एडवोकेट रामकुमार शर्मा ने कहा है कि शहर में सार्वजनिक सड़कों, नालों एवं सरकारी भूमि पर स्थित समस्त अवैध धार्मिक एवं अन्य अतिक्रमणों का उच्च स्तरीय सर्वे कराया जाए। सर्वोच्च न्यायालय व इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों के अनुरूप निष्पक्ष एवं समान कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। यातायात, जल निकासी एवं जनसुरक्षा को प्रभावित करने वाले अतिक्रमणों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए। ऐसे अवैध अतिक्रमणों को संरक्षण प्रदान करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। विधिक नोटिस की प्राप्ति के 15 दिवस के भीतर प्रभावी कार्यवाही करते हुए उसकी सूचना लिखित रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक कार्यवाही नहीं की जाती है, तो उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध सक्षम न्यायालय के समक्ष क्षतिपूर्ति वाद संवैधानिक उपचार, रिट याचिका, जनहित याचिका, अवमानना याचिका तथा अन्य उपलब्ध विधिक की जाएंगी।
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