मेरठ। वकीलों के विरोध के चलते रजिस्ट्री कार्यालय पर ताला जड़ दिए जाने के चलते करीब छह करोड़ के राजस्व का फटका लगा है। दरअसल अधिवक्ता ई-पंजीकरण प्रणाली का विरोध कर रहे हैं, जबकि सरकार चाहती है कि काम ई-पंजीकरण प्रणाली से किया जाए। उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक संघ ई-पंजीकरण प्रणाली का विरोध कर रहा है। इसी विरोध के चलते आज रजिस्ट्री कार्यालय पर ताले डाल दिए गए। बाद में विरोध स्वरूप जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजा गया। उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन कुमार शर्मा ने बताया कि दस्तावेज लेखक/कातिब/डीड राइटर सदियों से प्रदेश सरकार के अभिन्न अंग रहे हैं और भूमि रजिस्ट्री के माध्यम से सही राजस्व दिलाने में सहयोग करते हैं। उन्होंने सरकारी आदेश के तहत ई-पंजीकरण को निजी संस्थाओं द्वारा संचालित किए जाने का विरोध किया, जिन्हें ‘फ्रंट ऑफिस’ का नाम दिया जा रहा है। शर्मा ने पूर्व की घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि पहले भी रिकॉर्ड के कंप्यूटरीकरण का कार्य एक निजी संस्था को सौंपा गया था। उस संस्था ने संविदा पर कर्मचारियों को नियुक्त किया, लेकिन वो सभी बीच में ही काम छोड़कर चले गए। उनके अधूरे कार्य को बाद में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों ने पूरा किया। अधिवक्ताओं का तर्क है कि जमीन-जायदाद के दस्तावेज बेहद गोपनीय होते हैं। सरकारी कर्मचारी/अधिकारी दस्तावेजों में गड़बड़ी करने से डरते हैं क्योंकि उन पर उच्च अधिकारियों और सरकारों का नियंत्रण होता है। दस्तावेज लिखने वाले व्यक्ति इन मामलों के विशेषज्ञ होते हैं। एसोसिएशन ने बताया कि प्रत्येक दस्तावेज का प्रारूप एक जैसा नहीं हो सकता, क्योंकि पक्षकारों और संपत्ति के आधार पर प्रारूप तैयार किया जाता है। इसलिए, कोई भी एक प्रारूप संवैधानिक रूप से सही नहीं माना जाएगा। इससे संपत्ति विवादों में वृद्धि होगी और कानून व्यवस्था खराब हो सकती है।
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