मेरठ।सुप्रीम कोर्ट ने सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता बरकरार रखते हुए परीक्षा पास करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी है, यूपी के लगभग 1.86 लाख शिक्षकों को इससे राहत मिली है, लेकिन अब लखनऊ से बेसिक शिक्षा विभाग के ठोस और स्पष्ट आदेशों का इंतजार है, जिससे बिना टीईटी पास किए प्रमोट हुए शिक्षकों की स्थिति स्पष्ट हो सके। हालांकि कोर्ट के आदेश की यदि बात की जाए तो सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक अर्हता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद वे जूनियर शिक्षक परेशान हैं, जो प्रमोशन पाकर इस पद तक पहुंचे हैं, लेकिन टीईटी पास नहीं की है। इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से कोई आदेश जारी न होने से भी शिक्षक असमंजस में हैं। शिक्षकों को यह डर सता रहा है कि क्या इन्हें रिवर्ट किया जाएगा? वहीं दूसरी ओर बेसिक के अफसरों को इस संबंध में लखनऊ के आदेश का इंतजार है। सुप्रीम आदेश में कहा गया है कि कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले बेसिक और जूनियर शिक्षकों को टीईटी पास करना जरूरी होगा। यह आदेश उन शिक्षकों पर भी लागू होगा, जो शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने से पहले से पढ़ा रहे है। इसके खिलाफ कई शिक्षकों और संगठनों ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर की। इन पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने TET से कोई छूट नहीं दी है, हालांकि TET पास करने की समयसीमा दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है।
सोशल मीडिया व मीडिया पर नो कमेंट
बेसिक के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इसको लेकर लखनऊ के निर्देशों का इंतजार है। जो कुछ इस संबंध में मीडिया में चल रहा है उस पर वह कुछ नहीं कहना चाहते, लखनऊ से जैसे आदेश आएंगे उसका अनुपालन कराया जाएगा। कोर्ट का कोई भी आदेश होता है तो उसके बाद विभागीय आदेश भी जरूरी है। अमल तो विभागीय आदेश पर ही किया जाएगा। जो भी असमंजस है, उसे विभाग को दूर करना चाहिए। वहीं, इस बारे में बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी का कहना है कि सभी अधिकारियों और विधि विशेषज्ञों के साथ बैठक कर इस पर फैसला किया जाएगा। शिक्षा विभाग में प्रमोशन के दौरान प्राइमरी शिक्षको के पास प्राइमरी के प्रधानाध्यापक के साथ जूनियर शिक्षक का भी विकल्प मिला था। कई शिक्षक प्राइमरी से जूनियर शिक्षक बन गए। ऐसे जूनियर शिक्षकों की नौकरी पर अब कोर्ट के आदेशों की तलवार लटक रही हे।
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