नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि भारत के लिए ‘इंडिया फर्स्ट’ (भारत प्रथम) सर्वोपरि है। जयशंकर ने दो टूक कहा कि भारत अपने 1.4 अरब नागरिकों के लिए विभिन्न स्रोतों से सस्ती और सुलभ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना जारी रखेगा। उनका इशारा रूस से मिलने वाले सस्ते तेल की खरीद की ओर था। इससे पहले ब्रिक सम्मेलन में शामिल होने के लिए तेहरान से नई दिल्ली पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची भी भारत को बेहद सस्ती दरों पर तेल देने की पेशकश कर चुके हैं, लेकिन फैसला मोदी सरकार को लेना है। वहीं दूसरी ओर जो कुछ एस जयशंकर ने कहा उसकी यूएस विदेश मंत्री को शायद उम्मीद नहीं रही होगी। वह आवाक रह गए। जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष को स्पष्ट किया कि जैसे अमेरिका ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर चलता है, उसी तरह भारत भी अपने राष्ट्रीय हितों और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं से बंधा हुआ है। भारत कई स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त कर रहा है और यह सुनिश्चित करेगा कि उसके नागरिकों को सस्ती ऊर्जा मिलती रहे। दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच शीघ्र अंतरिम व्यापार समझौते और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी चर्चा की।
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